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कालसर्प योग शुभ फल~Kalsarp Yoga Auspicious Results

 

Kalsarp Yoga Can Give You Auspicious Results

 

A person has Kalsarp Yoga due to specific placement of planets in respect to Rahu and Ketu. This yoga is considered an evil yoga.

According to astrology a person’s life may be destroyed due to the harmful effect of the kalsarp yoga. This is one aspect. The other aspect is that this yoga makes a person excellent in his chosen field.

In Vedic Astrology Kalsarp yoga does not find any special place. Around hundred years ago some astrologers traced out this yoga and gave it a special position. This yoga has been described as troublesome and is reputed to create obstacles in the life of the person who has it. Many astrologers earn huge amount of money from people by creating fear of this yoga in their mind. People happily spend money to safeguard themselves from the bad impact of the planets. The truth is, just as Saturn is not always bad for you kalsarp created by Rahu and ketu is also not always malefic.

If your Kundli has kalsarp yoga and you are afraid of it, throw away the fear out of your mind. There is no need to get disturbed because of this yoga as there are some real-world examples which prove that this yoga has given some people the highest amount of success. Many people have achieved a lot of success in spite the affliction of kalsarp yoga. Amongst them Dhiru Bhai Ambani, Sachin Tendulkar, Lata Mangeshkar, Hrishikesh Mukherjee, Pandit Jawahar Lal Nehru require mention.

Astrology says that Rahu and Ketu are shadow planets which are always apart seven houses. When all the other planets are placed between Rahu and Ketu, the Kalsarp Yoga is said to take effect. Rahu and Ketu are considered inauspicious planets like Saturn but they also have some beneficial impact like Saturn.

A person whose kundali has the Kalsarp yoga achieves success in his life if Rahu provides him benefic results. As Saturn forces a ‘sade saati’ person into laborious works and inspires him to reduce his inner weaknesses, Kalsarp makes the man dedicated, brave and honest. This way the kalsarp afflicted man utilizes his potential and attains success.

A kundali with Kalsarp yoga gives very good results from Jupiter in exalted state, or in own house, Rahu in exalted sign, Gajakeshari Yoga, and the fourth house. If seen in a positive way an individual who has kalsarp yoga in his kundli possesses excellent talent and personality. It is quite possible that the Kalsarp Yoga present in your Kundli might take you to the height of success. So do not worry about the difficulties you are facing in your life , instead give your best to solve them.

If you have Kalsarp Yoga, you’ll lag behind only if you’re careless or pessimistic. Kalsarp yoga is a blessing for hard working and dedicated people.

If Kalsarp Yoga has the ‘Trik Bhav’ and Rahu is placed in the second house or eighth house then a person faces several difficulties but they can be rectified using astrological remedies.

 

 

कुण्डली में राहु और केतु की उपस्थिति के अनुसार व्यक्ति को कालसर्प योग (Kalsarp Dosha) लगता है. कालसर्प योग को अत्यंत अशुभ योग माना गया है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह योग जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है उसका पतन होता है.यह इस योग का एक पक्ष है

जबकि दूसरा पक्ष यह भी है कि यह योग व्यक्ति को अपने क्षेत्र में सर्वक्षेष्ठ बनता है।
कालसर्प योग (Kalsarp Yoga) का प्राचीन ज्योतिषीय ग्रंथों में विशेष जिक्र नहीं आया है.तकरीबन सौ वर्ष पूर्व ज्योर्तिविदों ने इस योग को ढूंढ़ा.इस योग को हर प्रकार से पीड़ादायक और कष्टकारी बताया गया.आज बहुत से ज्योतिषी इस योग के दुष्प्रभाव का भय दिखाकर लोगों से काफी धन खर्च कराते हैं.ग्रहों की पीड़ा से बचने के लिए लोग खुशी खुशी धन खर्च भी करते हैं.परंतु सच्चाई यह है कि जैसे शनि महाराज सदा पीड़ा दायक नहीं होते उसी प्रकार राहु और केतु द्वारा निर्मित कालसर्प योग हमेंशा अशुभ फल ही नहीं देते.
अगर आपकी कुण्डली में कालसर्प योग (Kalsarp Yoga) है और इसके कारण आप भयभीत हैं तो इस भय को मन से निकाल दीजिए.कालसर्प योग से भयाक्रात होने की आवश्यक्ता नहीं है क्योंकि ऐसे कई उदाहरण हैं जो यह प्रमाणित करते हैं कि इस योग ने व्यक्तियों को सफलता की ऊँचाईयों पर पहुंचाया है.कालसर्प योग से ग्रसित होने के बावजूद बुलंदियों पर पहुंचने वाले कई जाने माने नाम हैं जैसे धीरू भाई अम्बानी, सचिन तेंदुलकर, ऋषिकेश मुखर्जी, पं. जवाहरलाल नेहरू, लता मंगेशकर आदि.  
ज्योतिषशास्त्र कहता है कि राहु और केतु छाया ग्रह हैं जो सदैव एक दूसरे से सातवें भाव में होते हैं.जब सभी ग्रह क्रमवार से इन दोनों ग्रहों के बीच आ जाते हैं तब यह योग बनता है. राहु केतु शनि के समान क्रूर ग्रह माने जाते हैं और शनि के समान विचार रखने वाले होते हैं.राहु जिनकी कुण्डली में अनुकूल फल देने वाला होता है उन्हें कालसर्प योग में महान उपलब्धियां हासिल होती है.जैसे शनि की साढ़े साती व्यक्ति से परिश्रम करवाता है एवं उसके अंदर की कमियों को दूर करने की प्रेरणा देता है इसी प्रकार कालसर्प व्यक्ति को जुझारू, संघर्षशील और साहसी बनाता है.इस योग से प्रभावित व्यक्ति अपनी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल करता है और निरन्तर आगे बढ़ते जाते हैं.
कालसर्प योग में स्वराशि एवं उच्च राशि में स्थित गुरू, उच्च राशि का राहु, गजकेशरी योग, चतुर्थ केन्द्र विशेष लाभ प्रदान करने वाले होते है.अगर सकारात्मक दृष्टि से देखा जाए तो कालसर्प योग वाले व्यक्ति असाधारण प्रतिभा एवं व्यक्तित्व के धनी होते हैं.हो सकता है कि आपकी कुण्डली में मौजूद कालसर्प योग आपको भी महान हस्तियों के समान ऊँचाईयों पर ले जाये अत: निराशा और असफलता का भय मन से निकालकर सतत कोशिश करते रहें आपको कामयाबी जरूरी मिलेगी.इस योग में वही लोग पीछे रह जाते हैं जो निराशा और अकर्मण्य होते हैं परिश्रमी और लगनशील व्यक्तियों के लिए कलसर्प योग राजयोग देने वाला होता है.
कालसर्प योग (Kalsarp Yoga) में त्रिक भाव एवं द्वितीय और अष्टम में राहु की उपस्थिति होने पर व्यक्ति को विशेष परेशानियों का सामना करना होता है परंतु ज्योतिषीय उपचार से इन्हें अनुकूल बनाया जा सकता है. 


 
 
 
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