» 13 माह का होगा इस बार हिन्दू नववर्ष 

13 माह का होगा इस बार हिन्दू नववर्ष

 
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इस बार हिन्दू नववर्ष 13 माह का होगा। 23 मार्च को हिंदी पंचांग काल गणना का प्रथम माह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा अर्थात गुड़ी पड़वा है। इसे शास्त्रों में अबूझ मुहूर्त बताया गया है। अर्थात बिना पंचांग देखे ही कोई भी शुभ कार्य इस दिन प्रारंभ कर सकते हैं। भारतीय नववर्ष की शुरुआत अमृत सिद्घि और सर्वार्थ सिद्घि योग में होगी।

 अक्षय मुहूर्त में भारतीय नववर्ष की शुरुआत होती है और इसी दिन से चैत्रीय नवरात्रि भी प्रारंभ होते हैं। इस बार चैत्रीय नवरात्रि 10 दिन की होगी। सूर्य सिद्घांत के अनुसार इसी तिथि से दिन बड़े और रात छोटी होने लगती है। इसके साथ ही गर्मी की अधिकता होने लगती है। इसी दिन से भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2069 और संवत्सरों की श्रृंखला का 39वां विश्वावसु नामक संवत्सर जो कि 60 वर्ष बाद आता है प्रारंभ होगा।

अल्पवर्षा के योग : रोहिणी का निवास पर्वत पर होगा एवं समय का वास कुंभकार के घर होगा। नवमेघों में से केवल आवर्त नामक मेघ ही वर्षा करेगा। इस कारण सामान्य वर्षा के साथ अल्पवर्षा के योग भी बनेंगे। श्रमिक वर्ग की पूछ परख बढ़ जाएगी। किसी-किसी राज्य में सूखे की स्थिति भी निर्मित होगी।

प्रबल होगी देश की अर्थव्यवस्था : शुक्र के राजा एवं मंत्री होने से इस वर्ष जनता में ऐश्वर्य, सुख-सुविधा के साथ देश की अर्थव्यवस्था प्रबल होगी। महिलाओं का विशेष प्रभाव समाज में रहेगा। कई उच्च पदों पर महिलाएं पदासीन होंगी। महंगाई और अधिक बढ़ने के संकेत हैं। इस वर्ष बड़े राजनीतिक षड्यंत्र उजागर होंगे। सत्ताधीश संकट में आएंगे।

ग्रह योगों का विशिष्ट परिवर्तन : 16 मई 2012 से 4 अगस्त 2012 तक शनिदेव अतिवक्री होकर अपने चरम पर जाकर अपनी राशि तुला से पुनः कन्या राशि में 81 दिन के लिए आएंगे। इस वजह से सिंह को साढ़ेसाती एवं मिथुन, कुंभ को अढ़ैया शनि का प्रभाव रहेगा। ऐसी स्थिति प्रत्येक साढ़े सात वर्ष बाद बनती है। इस बार 3-3 बार चतुग्रर्ही और पंचग्रही तथा 1 बार षष्टग्रही योग बनेगा। इन संयोगों के बनने से उथल-पुथल की स्थिति रहेगी।
 
भाद्रपद में अधिक मास : इस बार भाद्रपद माह अधिक मास होंगे। यह दो बार आएगा। प्रथम और द्वितीय भाद्रपद होने से 13 माह की स्थिति बनेगी। 3 अगस्त से लेकर 31 अगस्त तक प्रथम भाद्रपद माह होगा और 1 सितंबर से लेकर 30 सितंबर तक द्वितीय भाद्रपद माह रहेगा।

 

गुड़ी पड़वा कल्पादि, सृष्ट्यादि और युगादि का पर्व है। इसका हमारे ग्रंथों में बहुत महत्व बताया गया है। प्रथम अवतार मत्स्यावतार भी इसी दिन हुआ है। अधिक मास हर तीसरे वर्ष होता है। नया वर्ष विश्व में सबसे प्राचीनतम नववर्ष और प्रकृति से जुड़ा हुआ वर्ष है। इसकी कल्पना करीब दो माह पहले से ही होने लगती है। यह हर कार्य के लिए शुभ है। एक बात और 13 माह का भारतीय नववर्ष होने से जन्माष्टमी के बाद जितने पर्व आएंगे वे एक माह आगे बढ़े होंगे। - ज्योतिषाचार्य आनंदशंकर व्यास 

संवत 2069 के विशेष पहलू : चैत्रीय नवरात्रि इस वर्ष 10 दिन की होगी। 23 मार्च को प्रतिपदा एवं 1 अप्रैल को रामनवमी होगी। इस कारण वर्ष उन्नति दायक होगा एवं शुभ फल मिलेंगे। भाद्रपद माह इस वर्ष अधिक मास होगा जो कि 32 माह 16 दिन और चार घड़ी के बाद आता है। अर्थात 3 वर्ष में अधिक मास आता है जो इस वर्ष 18 अगस्त से 16 सितंबर 2012 तक रहेगा। 

इस वर्ष 12 वर्ष पश्चात जब गुरु वृषभ राशि में एवं सूर्य व चंद्र मकर राशि में आते हैं तो तीर्थराज प्रयाग में महाकुंभ पर्व का संयोग बनता है। 2069 में यह संयोग 14 जनवरी 2013 से 25 फरवरी 2013 तक रहेगा।

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