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श्रावण सोमवार तीसरा व्रत ~Shravan(Sawan) Somvar Third Fast 2018
श्रावण सोमवार तीसरा व्रत ~Shravan(Sawan) Somvar Third Fast 2018
This year's श्रावण सोमवार तीसरा व्रत ~Shravan(Sawan) Somvar Third Fast 2018
Monday
श्रावण सोमवार व्रत तिथियां~Shravan(Sawan) Somvar vrat 2018 Dates

श्रावण सोमवार व्रत-1~ Shravan(Sawan) Somvar vrat-1 30th July 2018
श्रावण सोमवार व्रत-2~ Shravan(Sawan) Somvar vrat-2 6th  August 2018  
श्रावण सोमवार व्रत-3~ Shravan(Sawan) Somvar vrat-3 13th  August 2018   
श्रावण सोमवार व्रत-4 ~Shravan(Sawan) Somvar vrat-4 20th  August 2018

Shravan Month Mondays are very auspicious and fast kept on these Mondays are very fruitful. Shravan month is dedicated to Lord Shiva. Amarnath Yatra, Kawad Yatra, Shravan Monday Fasts, Full Shravan Fasts are major Shiv Pooja related activities take place in this month.

How to Observe Shravan Monday : Fast In the morning after taking bath do puja in Shiv Temple or at home. Do puja of Shiva-Parvati with Ganesha and Nandi. Offer Water, Milk, Curd, Honey, Ghee, Sugar, Moli, Roli, Janeu, Belpatra, Bhang, Dhtura, Dhoop, Lamp and donations. Along with these grass or round ball of atta with sugar inside it can be offered for Nandi. In the evening do Puja with Ghee, Kapur and Gugle, and recite Shiv Arti. This method is followed for all Monday fasts of Shravan Month.

Benefits of Practicing Shravan Monday Fast : Married woman get good luck as result of this fast. Students get knowledge and wisdom as result of Shravan Monday fasts. Unemployed and Indigenous people gets employment, work and honor too. Homemakers,  Professional or Businessman got increase in wealth and laxmi due to the fasting on Shravan Monday  If the adults and the elder person perform a fast on Monday, they get happiness, prosperity and comfort in this folk and the other world. Bathing with gangaa jal and offered water in the temple and on shiva linga. Even today, a grand ceremony of kanwar Yatra is organized in North India.To bring the Gangajal, devotees come to the holy places like Haridwar, Garh Ganga and Prayag and bring Kawad to Jalabhishek at Shivalinga of their hometown temple. All these ritual are to receive the blessings of Shiva. In todays sinful and world of  degenerated rites, by practicing the fasting of the Shravan Monday by forgiveness of Lord Shiva, the sin will be destroyed by the blessed grace of Ashutosh Bhagwan. All get peace and prosperity as result of this fast.

श्रावण मास के समस्त सोमवारों के दिन व्रत करने से पूरे साल भर के सोमवार व्रत का पुण्य मिलता है। अमरनाथ यात्रा, कवाड़ यात्रा, श्रावण सोमवार व्रत, पूर्ण श्रावण व्रत इस महीने में प्रमुख शिव आराधना के अनुष्ठान होते हैं।

श्रावण सोमवार व्रत विधि : सोमवार के व्रत के दिन प्रातःकाल ही स्नान ध्यान के उपरांत मंदिर देवालय या घर पर श्री गणेश जी की पूजा के साथ शिव-पार्वती और नंदी की पूजा की जाती है। इस दिन प्रसाद के रूप में जल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी, जनेऊ, चंदन, रोली, बेल पत्र, भांग, धतूरा, धूप, दीप और दक्षिणा के साथ ही नंदी के लिए चारा या आटे की गोली बनाकर भगवान पशुपतिनाथ का पूजन किया जाता है। रात्रिकाल में घी और कपूर सहित गुगल, धूप की आरती करके शिव महिमा का गुणगान किया जाता है। लगभग श्रावण मास के सभी सोमवारों को यही प्रक्रिया अपनाई जाती है।

श्रावण सोमवार व्रत फल : सुहागन स्त्रियों को इस दिन व्रत रखने से अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है। विध्यार्थियो को सोमवार का व्रत रखने से और शिव मंदिर में जलाभिषेक करने से विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है।बेरोजगार और अकर्मण्य जातकों को रोजगार तथा काम मिलने से मानप्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। सदगृहस्थ नौकरी पेशा या व्यापारी को श्रावण के सोमवार व्रत करने से धन धान्य और लक्ष्मी की वृद्धि होती है। प्रौढ़ तथा वृद्ध जातक अगर सोमवार का व्रत रख सकते हैं, तो उन्हें इस लोक और परलोक में सुख सुविधा और आराम मिलता है। सोमवार के व्रत के दिन गंगाजल से स्नान करना और देवालय तथा शिव मंदिर में जल अर्पण किया जाता है। आज भी उत्तर भारत में कांवड़ यात्रा का भव्य आयोजन किया जाता है।श्रद्धालु गंगाजल लाने के लिए हरिद्वार, गढ़ गंगा और प्रयाग जैसे तीर्थो में जाकर जलाभिषेक करने हेतु कांवड़ लेकर आते हैं। यह सब अनुष्ठान शिवजी की कृपा प्राप्त करने के लिए है। आज के इस पापमय और पतित संस्कारों की दुनिया में अगर श्रावण सोमवार के व्रत रखते हुए भगवान शिव से माफी मांग ली जाए तो उस आशुतोष भगवान की औघड़दानी कृपा दृष्टि से पाप नष्ट होंगे। तथा इस उपवास के परिणामस्वरूप सभी को शांति और समृद्धि मिलती है।
 
 
 
 
 
 
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