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Amarnath Yatra~अमरनाथ यात्रा

One of the most important events during July/ August is Amarnath Yatra to the Holy Pilgrimage. This is an annual event when thousands of Hindus from different corners of the Globe visit Amarnath caves. The pilgrims trek from Pahalgam to these caves and worship the great ice Lingam.

Legend has it that Shiva recounted to Parvati the secret of creation in a cave in Amarnath. Unknow to them, a pair of mating doves eavesdropped on this conversation and having learned the secret, are reborn again and again, and have made the cave their eternal abode.Many pilgrims report seeing the doves-pair when they trek the ardous route to pay obeisance before the ice-lingam (the phallic symbol of Shiva).

This is an event you certainly will talk about for the rest of your life.

July is time for the annual Amarnath Yatra one of the most sacred and popular pilgrimages to the holy snow-clad cave shrine of Lord Shiva in the beautiful northern Indian state of Jammu & Kashmir. Of all Hindu pilgrimages, Amarnath situated at an altitude of 3,880 metres in the southern Kashmir Himalayas is considered one of the holiest.

 

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निरंतर चलते रहने के कारण नदियां तालाबों की तुलना में पवित्र मानी जाती हैं। जीवन को संपूर्णता में जीने के लिए जरूरी है कि उसमें बदलाव होता रहे। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए मनीषियों ने देशाटन, पर्यटन या यात्राओं की शुरुआत की। यात्राएं जीवन की नीरसता को तोडकर उसमें नई ऊर्जा का संचार करती हैं। ये यात्राएं हमें आध्यात्मिक शुद्धि के साथ प्रकृति से एकाकार होने का अवसर भी उपलब्ध करवाती हैं। ऐसी ही है पवित्र अमरनाथ यात्रा। मैदानों, पहाडों, झीलों और सरोवरों से होकर गुजरने वाली इस यात्रा के दौरान पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है।

श्रावण मास को शिव आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इसी पवित्र मास में समुद्र तल से तकरीबन 13,600 फुट की ऊंचाई पर अमरनाथ गुफा में पवित्र हिमलिंग का निर्माण होता है। यह हिमलिंग चंद्रमा के आकार के साथ बढता और घटता रहता है। श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूर्ण विकसित रूप में दिखाई देता है। इसी पवित्र हिमलिंग के दर्शन के लिए देश भर से लाखों श्रद्धालु पवित्र अमरनाथ यात्रा के लिए आते हैं।

हिमलिंग के संदर्भ में एक प्राचीन कथा भी है। कहा जाता है कि एक बार मां पार्वती ने भगवान शिव से अमरत्व का रहस्य जानना चाहा। इसके लिए भगवान शिव ने जिस निर्जन स्थान की तलाश की, वह यही अमरनाथ गुफा है। रास्ते भर वे अपने शरीर पर मौजूद रहने वाले जीवों, तत्वों और प्रतीकों को छोडते चले गए। यात्रा के दौरान वे स्थान उन्हीं नामों के साथ आज भी यात्रियों को मिलते हैं। अपने नंदी बैल को उन्होंने जहां छोडा वही स्थान आज पहलगाम (बैल ग्राम का तद्भव रूप) के नाम से जाना जाता है। यहीं से होती है यात्रा की औपचारिक शुरुआत। इसके बाद उन्होंने अपने साथ लिपटे रहने वाले अनंत नागों, मस्तक के चंद्रमा, ढेरों पिस्सुओं और अंत में शेषनाग को मार्ग में छोड दिया। यही स्थान यात्रा मार्ग में अनंतनाग, चंदनबाडी, पिस्सूटॉप और शेषनाग के नाम से मौजूद हैं।

16वीं शताब्दी में इस गुफा की खोज एक मुसलमान गडरिये बूटा मलिक ने की थी। आज भी यात्रा से प्राप्त चढावे का एक भाग उनके परिवार को जाता है। इस तरह इसे धार्मिक सद्भाव की यात्रा भी कहा जा सकता है। रास्ते भर पिट्ठू वाले, पौनी वाले, लंगरों में सेवा में लगे सेवादार अपने धर्म के लिए नहीं, बल्कि सेवा भाव के लिए जाने जाते हैं। स्वच्छ हवा, साफ-सुथरे पहाड, दरिया का बहता ठंडा पानी। प्रकृति बाहें फैलाए आपके समक्ष होती है। दुनियावी विकार सब पीछे छूट जाते हैं। मन अपने आप से बातें करने लगता है। हर ओर से बम बम भोले और ओम नम: शिवाय की ध्वनि सुनाई देती है। वहां पहुंचकर लगता है कि अंतत: हम सबकी यात्रा एक ही है। सबको उसी प्रभु के चरणों में पहुंचना है। उसके सामने अमीर-गरीब, स्त्री-पुरुष, छोटा-बडा सब एक बराबर हैं।

आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक स्वच्छता और रोमांच से लबरेज अमरनाथ यात्रा अब सिर्फ साधु-संतों या मोक्ष-कामियों की ही यात्रा नहीं रही। दिनों दिन इसमें युवाओं और महिलाओं की संख्या भी बढ रही है। यात्रा के लिए भक्तों के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यात्रा शुरू होने से तकरीबन 12 दिन पहले ही यात्रा पंजीकरण करवाने वाले श्रद्धालुओं का आंकडा तीन लाख को पार कर गया।

अनिवार्य है स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र

यात्रा मार्ग अत्यंत दुर्गम और मौसम के लिहाज से असुरक्षित है। हजारों फुट की ऊंचाई पर कुछ रास्ते बेहद संकरे और दुर्गम हैं। बेहद ऊंचे और बर्फीले स्थानों पर ऑक्सीजन कम हो जाती है। इसलिए इस यात्रा पर उन्हें ही जाना चाहिए, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से फिट हों। पिछले वर्ष यात्रा में जान गंवाने वाले सौ के करीब श्रद्धालुओं में से अधिकतर की मृत्यु हृदय गति रुकने से हुई थी। इसलिए इस बार प्रशासन ने यात्रा के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया है।

ताकि जुडा रहे संवाद

जम्मू-कश्मीर में राज्य के बाहर के प्रीपेड मोबाइल काम नहीं करते। इसलिए यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बीएसएनएल ने एक यात्रा कार्ड जारी करने की योजना बनाई है। सात दिन की वैलिडिटी के साथ यह कार्ड 100 रुपये के भुगतान पर मिल सकता है। यह कार्ड केवल यात्रियों को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है। इसलिए सात दिन के बाद इसे रिचार्ज नहीं किया जा सकेगा।

 

 

 
 
 
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