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Festival - Ganga Dussehra 2018 Date
Ganga Dussehra dedicated to Goddess Ganga falls on Dashami Tithi or the tenth day of the bright half of the moon in month of Jyaistha. This is the day on which the sacred river Ganga descended on earth from heaven. So this festival is also known as Gangavataran which means the descent of the Ganga. This festival is celebrated for ten days beginning on the Amavasya and ends on the shukla dasami. Mother Ganges, which is considered as the divine river descending from heaven, is worshiped not only in India but also in the most sacred rivers in the world as a lifesaver divine river. Indias most sacred and revered river, and a holy dip in the Ganges can purify all sorts of sins. It is also considered by all Indians and famous scholars of the world. This festival is celebrated with great enthusiasm, mainly in the states Bihar and Uttar Pradesh.


On this very day, after the long time of spritiual efforts and austerity Suryavanshi King Bhagirath, the work for humanity was completed in the form of a river in the from the heavens to the earth. From that day, this sacred occasion of Ganga Dashwara is celebrated every year with Ganga Pooja for the implementation of many rites, rituals and spritual aspects.

If Ganga Snana is not possible on the Ganga Dashahara festival then you can pray at home or take bath in any other river or with  pure water. After this, the idol of Ganga-maa should be worshiped. Decorated the statue of Ganga with white cloth and white lotus. This day should also worship king Bhagirath and the Himalayas. Lord Shiva is the chief deity to worship during Ganga worship because he is the holder of the Ganga river and by his mercy, the Mother Ganga has been sent on earth for the welfare of mankind. The donation of ten types of food items on this day mainly fruits and black sesame seeds are considered the most auspicious.

On this day, devotees gather in Rishikesh, Haridwar, Garh-Muktishwar, Prayag, Varanasi to collectively meditate, take holy baths and bring the river mud house to perform worship at home. Some devotees also worship for paternal peace for their ancestors. Ganga Dussehra day is considered favorable for listing various auspicious activities like valuable items, buying new vehicles, buying a new house or entering.

 

देवी माँ गंगा को समर्पित गंगा दशहरा पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास(मई या जून) के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन देवी माँ गंगा पवित्र नदी स्वरूप धारण कर स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। इसलिए इस त्योहार को गंगा अवतरण भी कहा जाता है जिसका अर्थ है माँ गंगा का जन्म। यह त्यौहार ज्येष्ठ मास की अमावस्या से दस दिन तक मनाया जाता है और शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को समाप्त होता है। माँ गंगा जिन्हे स्वर्ग से उतरने वाली दिव्य नदी माना जाता है, केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में सबसे पवित्र नदियों में भी एक जीवन दायनी दिव्य नदी के रूप में पूजा जाता है। भारत की सबसे पवित्र एवं पूजनीय नदी है और गंगा में एक पवित्र डुबकी सभी प्रकार के पापों को शुद्ध कर सकती है। यह सभी भारतीयों और दुनिया के प्रसिद्ध विद्वानों द्वारा भी माना जाता है। यह त्यौहार मुख्यतः भारत के  बिहार, उत्तर प्रदेश राज्यों में बड़े हर्षोलास, उत्साह के साथ मनाया जाता है।

इसी दिन, सूर्यवंशी राजा भागीरथ की बहुत कठिन मेहनत और तपस्या के पश्च्यात, माँ गंगा को नदी स्वरूप में स्वर्ग से पृथ्वीलोक पर लाने का मानवकल्याण रुपी कार्य पूर्ण हुआ था। तभी से,हर साल गंगा दशहरा का यह पावन अवसर गंगा पूजा के साथ कई संस्कार,रीतियों और अनुष्ठानों के क्रियान्वयन के लिए मनाया जाता है।

यदि गंगा दशहरा पर्व पर गंगा स्नान संभव नहीं है तो आप घर पर भी अथवा किसी अन्य नदी या शुद्ध जल से स्नान करके प्रार्थना कर सकते है। इसके बाद गंगा माँ की मूर्ति के सम्मुख पूजा करनी चाहिए। गंगा माँ की मूर्ति को सफेद कपड़े और सफेद कमल के साथ सजाए। इस दिन राजा भागीरथ और हिमालय की पूजा भी करनी चाहिए। भगवान शिव गंगा पूजा के दौरान पूजा करने के लिए प्रमुख देवता हैं क्योंकि वह गंगा नदी के धारक हैं और उनकी दया से ही मानव जाति के कल्याण के लिए धरती पर माँ गंगा भेजी गई है। इस दिन दस प्रकार की खाद्य वस्तुओं का दान मुख्य रूप से फल और काले तिल के बीज सबसे शुभ माना जाता है।

इस
दिन श्रद्धालु भक्त ऋषिकेश, हरिद्वार, गढ़-मुक्तिश्वर, प्रयाग, वाराणसी में सामूहिक ध्यान करने के लिए जुटते हैं, पवित्र स्नान करते हैं और घर पर पूजा करने के लिए नदी मिट्टी घर लाते हैं। कुछ भक्त अपने पूर्वजों के लिए पितृ शांति पूजा भी करते हैं। गंगा दशहरे का दिन मूल्यवान वस्तुओं, नए वाहन खरीदने, नए घर खरीदने या प्रवेश करने जैसी विभिन्न शुभ गतिविधियों को सूचीबद्ध करने के लिए अनुकूल माना जाता है।

 

 

 
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