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Festival - Holika Dahan 2018~होली 2018

Holika Dahan will be observed in 2018 on thursday, March 1, 2018 According to Hindu scriptures Holika Dahan, which is also known as Holika Deepak or Chhoti Holi, should be done during Pradosh Kaal (which starts after sunset) while Purnimasi Tithi is prevailing. Bhadra prevails during first half of Purnimasi Tithi and all good work should be avoided when Bhadra prevails. Holika Dahan Muhurta is decided based on following rules. The first preference to get Holika Dahan Muhurta is during Pradosh while Purnimasi Tithi is prevailing and Bhadra is over. If Bhadra prevails during Pradosh but it ends before midnight then Holika Dahan should be done after Bhadra is over. If Bhadra is getting over after midnight then only Holika Dahan should be done in Bhadra and preferably during Bhadra Punchha. However one should avoid Bhadra Mukha and in no condition Holika Dahan should be done in Bhadra Mukha. Doing so brings bad luck for the whole year not only for individuals but for whole city and country. Many times Bhadra Punchha is not available between Pradosh and midnight. In such situations one should do Holika Dahan during Pradosh. In rare occasions when neither Pradosh nor Bhadra Punchha is available then one should do Holika Dahan after Pradosh. Choosing right Muhurta for Holika Dahan is more important than choosing right Muhurta for any other festivals. For other festivals doing puja at wrong time will not bring puja benefits but doing Holika Dahan at wrong time would bring suffering and misfortune. By midnight we mean Hindu midnight which is not same as 24.



हिन्दू सभ्यता संस्कृति के अनुसार होलिका दहन जोकि होलिका दीपक एवं छोटी होली के नामो से भी जानी जाती है पूर्णिमा तिथि के प्रदोष काल(जोकि सूर्यास्त के पश्च्यात प्रारम्भ होता है) को मनाई जाती है। पूर्णिमा तिथि के प्रथम प्रहर में भद्रा काल मन जाता है और सभी शुभ कार्य इस काल में नहीं किये जाते है। होलिका दहन महूर्त निम्न नियमो के अनुसार निकाला जाता है। होलिका दहन महूर्त के लिए पहली प्राथमिकता पूर्णिमा तिथि के प्रदोष काल में जब भद्रा समाप्त हो गयी हो को दिया जाता है। यदि प्रदोष काल में भद्रा है और यह अर्धरात्रि से पूर्व समाप्त हो रही है तो होलिका दहन भद्रा के समाप्त होने पर किया जाता है। यदि भद्रा अर्धरात्रि के पश्च्यात समाप्त हो रही है तो केवल उस स्थिति में ही होलिका दहन भद्रा में किया जाता है और वह भी भद्रा पुच्छ  में तथापि हमें भद्रा मुख से बचना ही चाहिए और किसी भी स्थिति में भद्रा मुख में होलिका दहन नहीं करना चाहिए। भद्रा मुख में होलिका दहन करने से पुरे वर्ष के लिए बुरा समय न केवल व्यक्तिगत अपितु  सरे शहर और राष्ट्र के लिए आता है। अनेक बार भद्रा पुच्छ प्रदोष और मध्यरात्रि के बीच के समय में नहीं होती। इस स्थिति में होलिका दहन प्रदोष काल में ही किया जाता है। किसी दुर्लभ परिस्थिति में यदि प्रदोष और भद्रा में से कोई भी काल नहीं है तो होलिका दहन प्रदोष काल के पश्च्यात किया जाता है। होलिका दहन के लिए सटीक मुहूर्त किसी भी अन्य त्यौहार के लिए मुहूर्त के समय से अधिक महत्वपूर्ण है। और मध्यरात्रि से हमारा तातपर्य हिन्दू मध्यरात्रि से को कि प्रत्येक दिन एक जैसी नहीं रहती।

 

 
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