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Festival - Hartalika Teej 2018 Date~हरतालिका तीज

Hartalika Teej~हरतालिका तीज in year 2018 Will be celebrated on 12th September, 2018.
hartalika teej
Hartalika Teej is a three-day festival, celebrated by women also in honor of Mata Parvati, in the month of Bhadaprda (July-September) according to Hindu Vikrami Samvat Calender.

Story Behind Hartalika Teej : By praying to Mata Parvati on these three days, unmarried girls hope to get a husband like Shiva. Married women pray to her for marital bliss. According to Hindu mythology, Mata Parvati was in love with Shiva. Being an ascetic however, Shiva was not aware of her.

Mata Parvati performed penance on the Himalayas for many years before Shiva finally noticed her. Realizing the depth of her love and devotion, he agreed to marry her. Since then Mata Parvati has been worshipped as Haritalika.

Methods and process to perform Hartalika teej Fast : Women and young girls perform waterless fast on these three days, and keep awake all three nights. This is symbolic of the penance which Mata Parvati undertook to get Shiva as her husband. Devotee who perform this fast will offer food to Brahmins and young girls.

 

हरतालिका तीज हिंदू विक्रमी संवत कैलेंडर के अनुसार भादप्रद (जुलाई-सितंबर) के महीने में मनाया जाने वाला तीन दिवसीय त्योहार है। जोकि माता पार्वती के पूजन के लिए महिलाओं द्वारा मनाया जाता है।

हरतालिका तीज पर्व कथा : इन तीन दिनों में माता पार्वती का पूजन करके, अविवाहित लड़कियां भगवान् शिव जैसा पति पाने की प्रार्थना करती हैं। विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख के लिए उनसे प्रार्थना करती हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती शिव से प्यार करती थीं। हालांकि तपस्या में लीन होने के कारण शिव को उसके बारे में पता नहीं था।

माता पार्वती ने कई वर्षों तक  हिमालय  पर तपस्या की और भगववान शिव ने आखिरकार उन्हें देखा। माँ पार्वती के प्यार और भक्ति के भाव को समझते हुए, भगवान् शंकर उनसे शादी करने के लिए तैयार हो गए। तब से माता पार्वती की पूजा हरतालिका तीज के रूप में की जाती है।

हरतालिका तीज व्रत विधि एवं प्रक्रिया : महिलाएं और युवा लड़कियां इन तीन दिनों में पानी रहित (निर्जला) उपवास करती हैं, और तीनों रातों में जागती रहती हैं। यह तपस्या का प्रतीक है जिसके द्वारा माता पार्वती ने भगवान् शिव को अपने पति रूप में प्राप्त करने का प्रयास किया था। जो भक्त इस व्रत को रखते है ब्राह्मणों और युवा लड़कियों को भोजन प्रशाद देते हैं।

 

 

 
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