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Festival - Devuthni Ekadashi date 2019


प्रबोधिनी एकादशी जिसे देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है | यह हिंदुओं द्वारा मनाई जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक है जो पारंपरिक हिंदू कैलेंडर में कार्तिक के शुभ महीने के शुक्ल पक्ष के दौरान एकादशी तिथि (11 वें दिन) पर होती है।  ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह पर्व अक्टूबर-नवंबर के महीने में पड़ता है। इस वर्ष देवउठनी एकादशी 8 नवंबर 2019 को मनाई जाएगी |प्रबोधिनी एकादशी को देव उत्थान एकादशी, विष्णु-प्रबोधिनी या देव प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी पुकारा जाता है। इस दिन भविष्यवक्ता तुलसी विवाह समारोह का आयोजन भी किया जाता है और चातुर्मास की अवधि, जब भगवान विष्णु के सोने का समय होता हैं, उसी समय प्रबोधिनी एकादशी का समापन भी होता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी पर सो जाते हैं और प्रबोधिनी एकादशी के दिन उठते हैं।


देवउठनी एकादशी 2019 के लिए मुहूर्त:

प्रबोधिनी एकादशी का व्रत करने की तिथि : गुरुवार 7 नवंबर 2019

एकादशी तृतीया अपराह्न 11:25 बजे से 06 नवंबर, 2019 तक रहेगी

एकादशी तिथि 01 नवंबर, 2019 को प्रातः 01:54 पर समाप्त होगी


प्रबोधिनी एकादशी पराना मुहूर्त

पराना बहुत महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो सूर्योदय के अगले दिन द्वादशी के दिन किया जाता है।

8 नवंबर 2019 मंगलवार को पारन शुरू होगा। पराना का अर्थ है, उपवास को खोलना या समाप्त करना।

पराना समय: प्रातः 08:28 से प्रातः 08:52 तक।

पराना दिवस पर हरि वासरा का समापन क्षण: 08:28 पूर्वाह्न


प्रबोधिनी एकादशी का महत्व:

प्रबोधिनी एकादशी के बारे में सबसे पहले भगवान ब्रह्मा ने ऋषि नारद को बताया था और 'स्कंद पुराण' में भी इसका उल्लेख मिलता है। यह हिंदुओं के जीवन में अत्यधिक महत्व रखता है क्योंकि यह विवाह, बच्चे के नामकरण समारोहों, गृह प्रवेश जैसे शुभ समारोहों की शुरुआत का प्रतीक है। प्रबोधिनी एकादशी 'स्वामीनारायण संप्रदाय' के बीच काफी महत्व रखती है। यह दिन उनके गुरु के गुरु  स्वामीनारायण के धार्मिक दीक्षा का सम्मान करता है। श्रद्धालु इस पवित्र व्रत का पालन करते हैं ताकि जीवन भर किए गए अपने बुरे कर्मों और पापों का निवारण कर सकें। इसके अलावा भगवान विष्णु का स्मरण करने से प्रबोधिनी एकादशी के पुण्य आपको प्राप्त होते है | ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से एक व्यक्ति ‘मोक्ष’ प्राप्त कर सकता है और मृत्यु के पश्चात सीधे वैकुंठ में प्रवेश कर सकता है।


प्रबोधनी एकादशी की कथा

प्रबोधनी एकादशी से जुडी एक पौराणिक कथा बहुत प्रचलित है | प्राचीन समय में  सूर्यवंशी मान्धाता नाम का एक राजा था | वह सत्यवादी, महान, प्रतापी और चक्रवती जैसे गुणों से परिपूर्ण था | वह अपनी प्रजा का पुत्र के भांति ध्यान रखता था | उसके राज्य में कभी भी अकाल नहीं पड़ा था |

एक समय राजा के राज्य में अकाल पड गया और प्रजा अन्न की कमी के कारण बहुत परेशान रहने लगी | राज्य में यज्ञ होने बन्द हो गयें | एक दिन प्रजा राजा के पास जाकर प्रार्थना करने लगी की हे राजन, समस्त विश्व के सुख का मुख्य कारण वर्षा है | इसी वर्षा के अभाव से राज्य में अकाल पड़ा है और अकाल के कारण ही प्रजा अन्न की कमी से मर रही है |

यह देख दु;खी होते हुए राजा ने भगवान से प्रार्थना की हे भगवान, मुझे इस अकाल को समाप्त करने का कोई उपाय बताईए | यह प्रार्थना कर मान्धाता मुख्य लोगो को साथ लेकर वन की और चल दिया, घूमते-घूमते वह ब्रह्मा के पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम में पहुंच गया | उस स्थान पर राजा रथ से उतरा और आश्रम में गया | वहां मुनि अभी प्रतिदिन की क्रियाओं से निवृ्त हुए थें, तभी राजा ने उनके सम्मुख प्रणाम किया, और मुनि ने उनको भी आशिर्वाद दिया, फिर राजा मुनि से बोला, कि हे महर्षि, मेरे राज्य में तीन वर्ष से वर्षा नहीं हो रही है, चारों और अकाल पडा हुआ है, और प्रजा अत्यंत दु:ख भोग रही है | राजा के पापों के प्रभाव से ही प्रजा को कष्ट मिलता है | ऎसा शास्त्रों में लिखा है, जबकि मैं तो धर्म के सभी नियमों का पालन करता हूँ |

इस पर ऋषि बोले की 'हे राजन, यदि तुम इससे मुक्ति ही चाहते हो, तो आषाढ मास के शुक्ल पक्ष की पद्मा नाम की एकादशी का विधि-पूर्वक व्रत करो | एक व्रत के प्रभाव से तुम्हारे राज्य में वर्षा होगी, और प्रजा फिर से सुख प्राप्त करेगी |

मुनि के कथन अनुसार राजा अपने नगर में वापस आया और उसने एकादशी का व्रत किया | इस व्रत के प्रभाव से राज्य में वर्षा हुई और मनुष्यों को सुख प्राप्त हुआ | देवशयनी एकाद्शी व्रत को करने से भगवान श्री विष्णु प्रसन्न होते है व् मोक्ष की इच्छा रखने वाले व्यक्तियों को इस एकादशी का व्रत अवश्य ही करना चाहिए |


प्रबोधनी एकादशी के रस्म रिवाज

देवउठनी एकादशी का पर्व विभिन्न भारतीय राज्यों में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ  मनाया जाता है। हालांकि, यह सार्वजनिक अवकाश नहीं है लेकिन यह श्रद्धालुओं द्वारा पूरे देश में मनाया जाता है। प्रबोधिनी एकादशी पर निम्न महत्वपूर्ण अनुष्ठान किए जाते हैं।


1) उपवास करना

देव प्रबोधिनी एकादशी के शुभ दिन पर, भक्त सुबह स्नान करते हैं और अपने ईश्वर के समक्ष उपवास करने का संकल्प लेते हैं।


2) मन्नत के लेखों का संग्रह

देवउठनी एकादशी पर अनुष्ठानों का प्रदर्शन हेतु कई महत्वपूर्ण लेखों में भी वर्णित हैं जैसे - ताजा कटे हुए गन्ने का पौधा, तुलसी का पौधा, शंख, बेल, भगवान कृष्ण की मूर्ति (विष्णु का अवतार), शालिग्राम - एक काला जीवाश्म पत्थर जिसे भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है ।


3) तुलसी का पौधा लगाएं

तुलसी का पौधा पूरे देश के हर हिंदू घरों में मिलने वाला सबसे आम पौधा है। किसी भी तरह से अगर आपके घर में यह पौधा नहीं है, तो अपने घर में तुरंत तुलसी का पौधा लगायें, क्योंकि यह स्वास्थ्य और आध्यात्मिक लाभों के अलावा घर में शांति और समृद्धि लाता है।


प्रबोधिनी एकादशी के शुभ दिन पर भगवान् विष्णु के साथ तुलसी का विवाह किया जाता है। जिस समय के दौरान तुलसी विवाह किया जाता है वह ज्योतिषियों और धार्मिक तपस्वियों द्वारा सूक्ष्म रूप से निर्धारित किया जाता है। शादी की रस्में निभाने के लिए मंडप बनाने के लिए गन्ने को एक साफ कपड़े या धागे से बाँध दिया जाता है।

 

4) बेल पत्र

अनुष्ठान के दौरान भगवान विष्णु को बेल पत्र अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि यह इससे व्यक्ति को आनंद की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु को अगस्त्य के फूल अर्पित करना भी इस अवसर के दौरान बहुत महत्व रखता है।

 

5) व्रत खोलना

ज्योतिषियों द्वारा एकादशी के अगले दिन यानी द्वादशी के दिन निर्धारित समय पर व्रत खोला जाता है। आमतौर पर व्रत खोलने का सबसे अच्छा समय सुबह या शाम को होता है। दोपहर में व्रत खोलने से बचना चाहिए।

 

 

 

 

Prabodhini Ekadashi, also known as Devuthani Ekadashi. It is one of the most important Ekadashis celebrated by Hindus on the Ekadashi date (11th day) during the Shukla Paksha of the auspicious month of Kartik in the traditional Hindu calendar. According to the Gregorian calendar, this festival falls in the month of October-November. This year Devauthani Ekadashi will be celebrated on 8 November 2019. Prabodhini Ekadashi is also called as Dev Utthan Ekadashi, Vishnu-Prabodhini or Dev Prabodhini Ekadashi. On this day the prophet Tulsi marriage ceremony is also organized and the period of Chaturmas, when Lord Vishnu is sleeping, is also the end of Prabodhini Ekadashi. According to Hindu scriptures, Lord Vishnu falls asleep on Devashyani Ekadashi and wakes up on the day of Prabodhini Ekadashi.

 

Muhurat for Devauthani Ekadashi 2019:

Prabodhini Ekadashi fasting date: Thursday 7th November 2019

Ekadashi Tritiya will be from 11:25 pm to 06 November 2019.

Ekadashi date ends on 01 November 2019 at 01:54 AM

 

Prabodhini Ekadashi Parana Muhurat

Parana is a very important ritual, which is performed on Dwadashi on the next day of sunrise.

Paran will begin on Tuesday, 8 November 2019. Parana means to open or end the fast.

Paraná Time: 08:28 am to 08:52 am.

Hari Vasara's closing moment on Parana Day: 08:28 AM


Importance of Prabodhini Ekadashi:

Prabodhini Ekadashi was first told by Lord Brahma to the sage Narada and is also mentioned in the 'Skanda Purana'. It holds immense importance in the lives of Hindus as it marks the beginning of auspicious ceremonies such as marriages, child naming ceremonies, home entrances. Prabodhini Ekadashi holds great importance among the 'Swaminarayan sect'. The day honors the religious initiation of his mentor Guru Swaminarayan. The devotees observe this holy fast so that they can get rid of their evil deeds and sins committed throughout their life. Apart from this, you get the blessings of Prabodhini Ekadashi by remembering Lord Vishnu. It is believed that by observing this fast, a person can attain 'Moksha' and can enter Vaikunth directly after death.

 

Story of Prabodhni Ekadashi

A legend associated with Prabodhani Ekadashi is very popular. In ancient times, there was a king named Suryavanshi Mandhata. He was truthful, great, majestic and full of qualities like Chakravati. He used to take care of his subjects like a son. There was never a famine in his kingdom.

Once upon a time there was a famine in the king's kingdom and people were very upset due to lack of food grains. Yagyas in the state have stopped. One day I went to the Praja Raja and started praying, O Rajan, rain is the main reason for happiness of the whole world. Due to the lack of this rain, there is a famine in the state and due to the famine, people are dying due to lack of food grains.

Seeing this, the king prayed to God, God, tell me some way to end this famine. After praying this, the Mandhata took the main people along and walked towards the forest, while wandering, he reached the ashram of Angira Rishi, son of Brahma. At that place the king descended from the chariot and went to the ashram. There, the sage was just retired from the daily activities, when the king bowed before him, and the sage blessed him too, then said to the king sage, O Maharishi, my kingdom has not been raining for three years, all four. And there is a famine, and the people are suffering very sadly. People suffer only due to the influence of the sins of the king. It is written in such scriptures, while I follow all the rules of religion.

On this, the sage said, 'O Rajan, if you want to get rid of it, then observe the Ekadashi named Padma of Shukla Paksha of Ashada month. Due to the effect of a fast, there will be rain in your state, and the people will get happiness again.

According to the sage's statement, the king returned to his city and fasted on Ekadashi. Due to the effect of this fast, there was rain in the state and humans got happiness. Lord Shri Vishnu is pleased by observing the fast of Devshayani Ekadashi and people desiring salvation must do this Ekadashi fast.


Prabodhani Ekadashi Rituals

The festival of Devauthani Ekadashi is celebrated with full devotion and Exaltation in various Indian states. However, it is not a public holiday but it is celebrated by devotees across the country. The following important rituals are performed on Prabodhini Ekadashi.


1) Fasting

On the auspicious day of Dev Prabodhini Ekadashi, devotees bathe in the morning and resolve to fast before their God.

 

2) Collection of Mannat articles

A number of important articles are also mentioned for performing rituals on Devauthani Ekadashi such as freshly cut sugarcane plant, basil plant, conch, vine, idol of Lord Krishna (incarnation of Vishnu), Shaligram - a black fossil stone called Lord Vishnu Is considered a symbol of.


3) Plant Tulsi

The Tulsi plant is the most common plant found in every Hindu household across the country. By any means, if you do not have this plant in your house, then plant a basil plant immediately in your house, as it brings peace and prosperity to the house besides health and spiritual benefits.

Tulsi is married to Lord Vishnu on the auspicious day of Prabodhini Ekadashi. The time during which a Tulsi marriage is performed is subtly determined by astrologers and religious ascetics. Sugarcane is tied with a clean cloth or thread to make a pavilion for performing wedding rituals.


4) Bel letter

Offering Bel letter to Lord Vishnu during the ritual is considered very auspicious and it is believed that it brings happiness to a person. Offering of Agastya flowers to Lord Vishnu is also very important during this occasion.


5) Opening fast

The fast is opened by astrologers at a fixed time on the next day of Ekadashi i.e. on Dwadashi. The best time to open the fast is usually in the morning or evening. Fasting in the afternoon should be avoided.

 
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