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Festival - Mokshada Ekadashi 2019 Date


मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष मोक्षदा एकादशी में 8 दिसंबर 2019 को मनाई जाएगी। मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी कई पापों का नाश करने वाली एकादशी मानी जाती है। मोक्षदा एकादशी को दक्षिण भारत में वैकुंठ एकादशी के नाम से जाना जाता है। व् उसी दिन, भगवान कृष्ण ने महाभारत शुरू होने से पूर्व अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।

इस दिन श्री कृष्ण और गीता की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन ब्राह्मण व् किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने, दान आदि करने से विशेष फल मिलने की सम्भावनायें बढ़ जाती है। यह एकादशी मोक्षदा के नाम से पुरे भारतवर्ष में लोकप्रिय है। इस दिन भगवान दामोदर की पूजा करने का विधान है।


मोक्षदा एकादशी व्रत शुभ मुहूर्त व् दिनांक

मोक्षदा एकादशी परना मुहूर्त: 07:01:55 pm से 09:06:27 pm 9 दिसंबर तक

अवधि: 2 घंटे 4 मिनट


मोक्षदा एकादशी का महत्व:

पौराणिक लोककथाओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि मोक्षदा एकादशी व्रत करने से, पालनकर्ता अपने पितरों व्  मृत पूर्वजों तक को मोक्ष या मुक्ति प्रदान कर सकता है। इस दिन को गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है क्योंकि इस दिन, कुरुक्षेत्र के महाभारत युद्ध के दौरान प्रसिद्ध हिंदू ग्रंथ गीता का ज्ञान, भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया था। इस वजह से, मोक्षदा एकादशी को वैष्णवों या भगवान विष्णु के भक्तो के लिए शुभ माना जाता है। मोक्षदा एकादशी का दिन किसी भी योग्य व्यक्ति को भगवद गीता उपहार में देने के लिए भी अनुकूल है ताकि उसे भगवान विष्णु का प्यार और स्नेह प्राप्त हो सके। कई हिंदू धर्मग्रंथों में मोक्षदा एकादशी का महत्व वर्णित है और इस दिन उन्हें सुनने से व्यक्ति को उतने ही गुण प्राप्त होते हैं जितने धार्मिक कार्यक्रम में घोड़े दान करने से प्राप्त होते हैं। विष्णु पुराण में यह भी संदर्भित है कि मोक्षदा एकादशी व्रत हिंदू वर्ष में अन्य 23 एकादशी व्रतों के संयुक्त लाभों के समान है। इस वजह से यह एकादशी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है |

 

मोक्षदा एकादशी की कथा

बहुत समय पहले गोकुल नामक नगर में वैखानस नाम का एक राजा शासन किया करता था। एक दिन राजा ने अपने स्वपन में देखा कि उसके पिता नर्क में पीड़ित हैं और अपने पुत्र से मुक्ति की प्राथर्ना कर रहे हैं। पिता की ऐसी दुर्दशा देखकर राजा चिंतित हो गया। प्रातः काल, राजा ने सभी विद्वान् ब्राह्मणों को बुलाया और अपने सपने का रहस्य पूछा। तब ब्राह्मणों ने कहा - हे राजन! इस संबंध में, आप पर्वत नामक भिक्षु के आश्रम पर जाएँ और अपने पिता की मुक्ति का उपाय पूछें। राजा ने  ऐसा ही किया। जब पर्वत भिक्षु ने राजा की बात सुनी, तो वे गंभीर हो उठे। उन्होंने कहा- हे राजन! पिछले जन्मों के कर्मों के कारण ही तुम्हारे पिता नर्क में पीड़ित है। अब आप मोक्षदा एकादशी का व्रत करें और उसका फल( पुण्य ) अपने पिता को अर्पित करें, तभी वे इस संकट से निकल सकते है। राजा ने मुनि के कहे अनुसार मोक्षदा एकादशी व्रत का पालन किया और ब्राह्मणों को भोजन, दक्षिणा और कपड़े आदि भेंट करके आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात, व्रत के गुणकारी प्रभाव के कारण राजा के पिता को मोक्ष की प्राप्ति हुई।


मोक्षदा एकादशी के अनुष्ठान

मोक्षदा एकादशी की पूर्व संध्या पर, भक्त सुबह जल्दी उठते हैं और सूर्योदय से पूर्व स्नान करते हैं ।

वे पूरे दिन के लिए उपवास रखते हैं क्योंकि यह सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है। वे खुद को कुछ भी पीने खाने से दूर रखते हैं। व्रत 24 घंटे की अवधि के लिए रखा जाता है जो एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक होता है।

उपवास के दुग्ध स्वरूप में, भक्त शाकाहारी भोजन, फल, दुग्ध उत्पाद, और दूध का सेवन कर सकते हैं। गर्भवती महिलांए भी इस व्रत को रख सकती है।

व्रत पालनकर्ता को मोक्षदा एकादशी की पूर्व संध्या पर लहसुन, प्याज, दालें, अनाज और चावल आदि का सेवन करने की मनाही होती है।

भगवान विष्णु के अनुयायी बेल वृक्ष की पत्तियों का भी सेवन कर सकते हैं ।

भगवान् अपनी कृपादृष्टि उन पर बनायें रखे इसके लिए लोग भगवान विष्णु की अत्यंत भक्तिभाव के साथ प्रार्थना और पूजा करते हैं।

इस शुभ अवसर पर, इस दिन कुछ लोग भगवद गीता की पूजा करते हैं तो कई मंदिरों में उपदेश पढ़ते हैं।

व्रत पालनकर्ता भगवान कृष्ण की पूजा और भक्ति में लीन रहते हैं। शाम के समय, श्रद्धालु भगवान विष्णु के मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं।

ऐसी मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी की पूर्व संध्या पर मुकुंदष्टकम, विष्णु सहस्रनाम और भगवद गीता पढ़ना अत्यधिक शुभ माना जाता है।

 





Ekadashi of Shukla Paksha of Margashirsha month is called Mokshada Ekadashi. This year Mokshada Ekadashi will be celebrated on 8 December 2019. Ekadashi of Shukla Paksha of Margashirsha month is considered Ekadashi which destroys many sins. Mokshada Ekadashi is known as Vaikuntha Ekadashi in South India. On the same day, Lord Krishna preached the Gita to Arjuna before the Mahabharata began.

Worshiping Shri Krishna and Gita on this day is considered extremely auspicious. On this day, the Brahmin and any needy person's food, donation, etc. increases the chances of getting special fruits. This Ekadashi is popular all over India by the name of Mokshada. On this day, there is a law to worship Lord Damodar.


Mokshada Ekadashi Fasting Auspicious Time

Mokshada Ekadashi Parana Muhurta: 07:01:55 pm to 09:06:27 pm from 9 December

Duration: 2 hours 4 minutes


Importance of Mokshada Ekadashi:

According to mythological folklore, it is believed that by observing Moksada Ekadashi fast, a follower can provide salvation or salvation to his ancestors and even to dead ancestors. This day is also celebrated as Gita Jayanti because on this day, during the Mahabharata War of Kurukshetra, knowledge of the famous Hindu scripture Gita, was given to Arjuna by Lord Krishna. Because of this, Mokshada Ekadashi is considered auspicious for Vaishnavites or devotees of Lord Vishnu. The day of Mokshada Ekadashi is also favorable to gift Bhagavad Gita to any worthy person so that he may receive the love and affection of Lord Vishnu. The importance of Mokshada Ekadashi is described in many Hindu scriptures and by listening to them on this day, one gets the same qualities as those obtained by donating horses in a religious program. The Vishnu Purana also refers that the Mokshada Ekadashi fast is similar to the combined benefits of the other 23 Ekadashi fasts in the Hindu year. Due to this, Ekadashi is considered very important.


Story of Mokshada Ekadashi

A long time ago a king named Vaikhanas ruled in a city called Gokul. One day the king in his dream saw that his father was suffering in hell and was praying for salvation from his son. The king got worried after seeing such a plight of his father. In the morning, the king called all learned Brahmins and asked the secret of his dream. Then the Brahmins said - O Rajan! In this regard, you visit the monk's ashram named Parvat and ask for the remedy of your father's salvation. The king did the same. When the mountain monk listened to the king, he became serious. He said- O Rajan! Because of the deeds of previous lives, your father is suffering in hell. Now you fast for Mokshada Ekadashi and offer its fruits (virtue) to your father, only then they can get out of this crisis. The king followed the Mokshada Ekadashi fast as told by the sage and received blessings by offering food, dakshina and clothes etc. to the Brahmins. After this, the king's father attained salvation due to the virtuous effect of the fast.

 

Rituals of Mokshada Ekadashi

On the eve of Mokshada Ekadashi, devotees wake up early in the morning and bathe before sunrise.

They keep fast for the whole day as it is one of the most important rituals. They keep themselves away from drinking anything. The fast is kept for a period of 24 hours which ranges from the sunrise of Ekadashi to the sunrise of Dwadashi.

In the milk form of fasting, devotees can consume vegetarian food, fruits, milk products, and milk. Pregnant women can also observe this fast.

The fast observant is prohibited from consuming garlic, onions, pulses, grains and rice etc. on the eve of Mokshada Ekadashi.

Followers of Lord Vishnu can also consume the leaves of the vine tree.

People pray and worship Lord Vishnu with utmost devotion, so that God may keep his blessings on them.

On this auspicious occasion, some people worship Bhagavad Gita on this day and read sermons in many temples.

The fast observant is absorbed in worship and devotion to Lord Krishna. In the evening, devotees visit the temples of Lord Vishnu.

It is believed that reading Mukundashtakam, Vishnu Sahasranama and Bhagavad Gita on the eve of Mokshada Ekadashi is considered highly auspicious.

 
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