Subscribe for Newsletter
Naraka Chaturdashi~नरक चतुर्दशी


नरक चतुर्दशी जिसे 'नरक निवारन चतुर्दशी' भी कहा जाता है, हिंदू भक्तो के लिए एक महत्वपूर्ण उत्सव है। इसे हिंदू कैलेंडर के अनुसार 'कार्तिक' के महीने में 'चतुर्दशी' या कृष्ण पक्ष के चौदहवें दिन देखा जाता है। इसे ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर-नवंबर की लंबी अवधि के समय मनाया जाता है। हिंदू धर्म के भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पर्व दिवाली के 5 दिवसीय त्योहारों के दूसरे दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार 'नरकासुर' नामक राक्षस की हार पर भगवान कृष्ण की जीत का जश्न मनाता है। इसे 'हनुमान जयंती' के रूप में भी मनाया जाता है, जो भगवान हनुमान का जन्मदिन है।


नरक चतुर्दशी की कहानी

पौराणिक लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में एक देवता था, रंति देवता। वह असाधारण रूप से चालाक और तेज तर्रार था। वह हमेशा मानव जाति के धार्मिक कार्यों और सेवाओं में खुद को शामिल करता था। एक दिन मृत्यु के भगवान्, यम, राजा की आत्मा को पाने के लिए उसके पास आई। राजा ने यम से पूछा कि मैंने जीवन भर कभी बुरा काम और पाप नहीं किया। तुम मुझे नर्क में क्यों ले आए, यम ने जवाब दिया कि बहुत समय पहले तुम अपने दरवाजे से एक भूखे पुजारी को लौटाया था। यही कारण है कि मैं आपको नर्क ले जाने के लिए यहाँ उपस्थित हुआ हूं।

राजा ने यम से एक वर्ष का जीवन पा लेने की अपनी इच्छा व्यक्त की। यम ने उन्हें एक वर्ष के जीवन की आज्ञा दी, और उसके बाद राजा ने सज्जन लोगों के साथ मुलाकात की तथा उन्हें अपनी कहानी सुनाई। उन्होंने उसे नरक चतुर्दशी पर व्रत रखने और अपनी पिछली गलतियों से सीखने और क्षमा याचना करने के रूप में पुजारियों को दान दक्षिणा देने की बात कही। और बताया कि इन कार्यो को कर वह अपने पिछले सभी गलत कामों से राहत पा सकते हो।

नरक चतुर्दशी पर सभी पापों से मुक्त होने के साथ-साथ स्वयं को नरक में जाने से दूर रखने के लिए भी मनाया जाता है।

 

नरक चतुर्दशी के दौरान अनुष्ठान

पूजन सामग्री में तेल, फल, फूल, चंदा आदि के साथ पूजन किया जाता है। नारियल को हनुमानजी को चढ़ाया जाता है और तिल और चावल के साथ घी व् शक्कर का मिश्रण अर्थात प्रसाद दिया जाता है।

काली चौदस की रस्म को मुख्यतः फसल त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पौष्टिक अर्ध-पकाया हुआ चावल (जिसे पोहा या पोवा कहा जाता है) से तैयार किया जाता है। यह चावल उस समय उपलब्ध ताजा फसल से लिया जाता है। यह रिवाज विशेष रूप से पश्चिमी भारत में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रचलित है।

इस दिन, आँखों में लगे काजल का एक तरफ का सिर का हिस्सा धोने और व् काजल लगाने से यह माना जाता है कि इससे बच्चे को काली नज़र (बुरी नज़र) से बचाया जा सकता है। कुछ लोग कहते हैं कि जो तांत्रिक क्रियाओ में हैं, वे इस दिन अपना 'मंत्र' सीखते हैं। वैकल्पिक रूप से, लोग स्थानीय देवी को नैवैध्य (भोजन) प्रदान करते हैं जिससे की उनका परिवार हमेशा काली शक्तियों से सुरक्षित रहता है। बुरी आत्माओं को भगाने व् उनसे बचाने के कारण इन देवी को उनकी 'कुल देवी' कहा जाता है। कुछ परिवार इस दिन अपने पुरखों को भोजन भी देते हैं। दिवाली से पहले दिन को गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में काली चौदस के नाम से जाना जाता है।

यह दिन भगवान कृष्ण का दैत्य नरकासुर पर जीत का जश्न मनाता है। इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठ जाते हैं। पुरुष स्नान करने से पहले अपने शरीर को सुगंधित तेलों से रगड़ते है । बाद में, स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं; कुछ लोग नए कपड़े पहनते हैं। रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ एक साथ मिलजुलकर प्रशाद का आनंद लेते है। शाम को, हर्ष मस्ती और शोर के माहौल में उज्ज्वल और जोरदार आतिशबाजी की जाती है। मध्याह्न भोजन के हिस्से के रूप में विशेष मीठे व्यंजन परोसे जाते हैं। शाम के समय तेल के दीपक से घर रोशन किया जाता है।

 



 

Naraka Chaturdashi, also known as 'Naraka Nivaran Chaturdashi', is an important festival for Hindu devotees. It is seen on the fourteenth day of 'Chaturdashi' or Krishna Paksha in the month of 'Kartik' according to the Hindu calendar. It is celebrated over a long period of October – November according to the Gregorian calendar. The most important festival for the devotees of Hinduism is celebrated as Naraka Chaturdashi, the second day of the 5-day festival of Diwali. The festival celebrates the victory of Lord Krishna over the defeat of a demon named 'Narakasura'. It is also celebrated as 'Hanuman Jayanti', which is the birthday of Lord Hanuman.

 

Story of Naraka Chaturdashi

According to mythological folklore, in ancient times there was a deity, Ranti Devta. He was exceptionally clever and fast-paced. He always involved himself in the religious functions and services of mankind. One day the God of death, Yama, came to him to get the king's soul. The king asked Yama that I never committed bad deeds and sins throughout my life. Why did you bring me to hell, Yama replied that a long time ago you returned a hungry priest from your door. That is why I am here to take you to hell.

The king expressed his desire to get one year of life from Yama. Yama commanded him for a year of life, and after that the king met with gentlemen and told him his story. He spoke of fasting him on Narak Chaturdashi and nurturing priests in the form of learning and apologizing for their past mistakes. You can get relief from all your past wrongs by doing these tasks.

On Naraka Chaturdashi, it is celebrated to be free from all sins as well as to keep oneself away from going to hell.

 

Ritual During Naraka Chaturdashi

Worshiping is done with oil, fruits, flowers, chanda etc. in the worship material. Coconut is offered to Hanumanji and a mixture of ghee and sugar along with sesame and rice is offered.

The ritual of Kali Chaudas is mainly celebrated as a harvest festival. On this day, nutritious semi-cooked rice (called poha or pova) is prepared. This rice is taken from the fresh crop available at that time. This custom is especially prevalent in both rural and urban areas in Western India.

On this day, washing one side of the head of mascara in the eyes and applying kajal is believed to protect the child from black eyes (bad eyesight). Some people say that those who are in tantric activities learn their 'mantra' on this day. Alternatively, people provide Niveda (food) to the local goddess so that their family is always protected from black powers. This goddess is called her 'Kul Devi' because of the evil spirits to drive away and protect the evil spirits. Some families also provide food to their ancestors on this day. The second day of Diwali is known as Kali Chaudas in parts of Gujarat, Rajasthan and Maharashtra.

The day commemorates Lord Krishna's victory over the demon Narakasura. On this day, the devotees get up early in the morning. Men rub their bodies with scented oils before bathing. Later, wear clean clothes; Some people wear new clothes. Together with relatives and friends enjoy a big breakfast. In the evening, bright and loud fireworks are lit in an atmosphere of joyous fun and noise. Special sweet dishes are served as part of the mid-day meal. In the evening the house is lighted with oil lamps.

 
 
 
Comments:
 
 
 
 
Festivals
 
 
Copyright © MyGuru.in. All Rights Reserved.
Site By rpgwebsolutions.com