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Pilgrimage in India -मुख्य धार्मिक स्थल


शिव पुराण के अनुसार भीमशंकर ज्योतिर्लिंग असम प्रान्त के कामरूप जनपद में ब्रह्मरूप पहाड़ी परस्थित है. कहते हैं जो भी मनुष्य प्रतिदिन प्रातः काल उठकर इस ज्योतिर्लिंग से सम्बन्धित श्लोकों का पाठ करता है अर्थात उपर्युक्त श्लोकों को पढ़ता हुआ शिवलिंगों का ध्यान करता है, उसके सात जन्मों तक के पाप नष्ट हो जाते हैं.

शिव पुराण के अनुसार पूर्व काल में भीम नामक एक महा बलशाली और पराक्रमी राक्षस था. वह अत्याचारी राक्षस धर्म का नाश करता था और लोगों को सताता था. भीम कुम्भकर्ण और कर्कटी का पुत्र था. माता से पिता के बारे में सुनकर भीम ने देवताओं को सबक सिखाने का सोचा. तब भीम ने अपनी शक्ति को और अधिक बढ़ाने के लिए घोर तपस्या किया और ब्रह्माजी से अतुलनीय बल प्राप्त किया. उसके बाद अपने अतुलनीय बल का घमंड लेकर भीम देवताओं से युद्ध करने लगा. कई देवताओं को हराने के बाद उसने सम्पूर्ण पृथवी को जितने का अभियान चलाया. इसके तहत उसने कामरूप देश के राजा और भगवन शिव के परम भक्त सुदक्षिण पर आक्रमण किया. सुदक्षिण को युद्ध में हराकर भीम ने कारागार में डाल दिया. जहां सुदक्षिण नित्य भगवन शिव की पूजा करता था. उससे प्रभावित होकर कारागार में बंद अन्य कैदी भी भोलेनाथ के भक्त हो गए और उनकी पूजा करने लगे. किसी ने राक्षस को बताया कि सुदक्षिण पार्थिवपूजन करके तुम्हारे लिए अनुष्ठान कर रहा है. उसी समय राक्षस ने सुदक्षिण को मारने का निर्णय लिया. जेल पहुंचकर जैसे ही राजा पर तलवार चलाया तभी रूद्र प्रकट हो गए और भीष्म को भस्म कर दिया. उसी समय ऋषि मुनियों ने भगवान शिव की स्तुति की और उनसे कहा कि भूतभावन शिव! यह क्षेत्र बहुत ही निन्दित माना जाता है इसलिए लोककल्याण की भावना से आप सदा के लिए यहीं निवास करें. भगवन ने उनके आग्रह को स्वीकार किया और ज्योतिर्लिंग के रूप में वही रह गए.

 

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