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कुछ दिन रुको, आराम से चले जाना

नासिक निवासी भाऊ साहब धुमाल पेशे से एक जाने-माने वकील थे| एक कानूनी मुकदमे के सिलसिले में उन्हें निफाड़ जाना था| चूंकि शिरडी रास्ते में पड़ता था इसलिए बाबा के दर्शन करने के लिए शिरडी में ही उतर गए| मस्जिद में जाकर दर्शन करने के बाद जब उन्होंने बाबा से जाने की आज्ञा मांगी तो बाबा ने उन्हें शिरडी में ही रुकने के लिए कहा| उन्हें तो अदालत में जाना जरूरी था, पर बाबा की आज्ञा का उल्लंघन करने का साहस उनमें न था| वह मजबूरी में रुक गये| वह रोजाना बाबा से आज्ञा मांगते जाते और बाबा उन्हें मना कर देते|

इस तरह उन्हें शिरडी में रहते हुए एक सप्ताह हो गया| एक सप्ताह बाद एक दिन जब उन्होंने बाबा से आज्ञा मांगी, तो इस बार ने उन्हें लौटने की अनुमति दे दी|

इस तरह जब वह सप्ताह बाद निफाड़ पहुंचे तो पता चला कि मुकदमे की सुनवाई करने वाले जज को पेट का रोग हो गया था जिस कारण मुकदमे की सुनवाई को आगे टालना पड़ा| उनके स्थान पर चार जजों ने महीनों तक मामले की सुनवाई कर निर्णय धुमाल के मुवक्किल ने सुना दिया| जिससे वह बरी हो गया| अब धुमाल को मालूम हुआ कि बाबा ने क्यों उन्हें जाने की अनुमति नहीं दी थी|

 
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