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बिना दवा के कर्णपीड़ा ठीक हो गयी

 आलंदी गांव (पूजा) के रहनेवाले एक स्वामी जी कर्णपीड़ा से बहुत दु:खी थे| उनके कान में इतना दर्द होता था कि वह रात को सो भी नहीं पाते थे| कान में सूजन बनी रहती थी| अनेकों इलाज करवाये पर कोई लाभ नहीं हुआ| डॉक्टरों ने ऑपरेशन करवाने को कहा|

एक बार स्वामी जी बाबा के दर्शन करने के लिए शिरडी आये| तब भी कानों में पीड़ा थी| उन्होंने अपनी परेशानी शामा को बता दी और उनसे बाबा से प्रार्थना करने की विनती की| शाम को जब स्वामी जी बाबा से मस्जिद लौटने की अनुमति लेने गए तो तब शामा ने बाबा से प्रार्थना कि - "हे देवा ! स्वामी जी के काम में बहुत पीड़ा है, आप इन पर कृपा करें|"

बाबा ने केवल इतना कहा - "अल्लाह अच्छा करेगा|" बाद में स्वामी जी पूना चले गए| आठ दिन बाद उनका पत्र आया, जिसमें लिखा था कि उनके कान का दर्द अब समाप्त हो गया है| सूजन अभी बाकी है इसलिए वे ऑपरेशन कराने मुम्बई भी गये थे| पर जांच करने के बाद डॉक्टर ने कहा अब इसकी कोई आवश्यकता नहीं है| सब बाबा की कृपा है, वह बाबा के चरणों में प्रणाम करते हैं|"



 
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