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चन्द्र ग्रहण के दौरान खाना खाने से क्यों रोकते हैं~ जानिए इसके पीछे की मान्यता

 
चन्द्र ग्रहण के दौरान खाना खाने से क्यों रोकते हैं~ जानिए इसके पीछे की मान्यताInformation related to चन्द्र ग्रहण के दौरान खाना खाने से क्यों रोकते हैं~ जानिए इसके पीछे की मान्यता.

आपने भी अपने घर में बड़े बुजुर्गों को यह कहते सुना होगा कि चंद्र ग्रहण के समय खाना नहीं खाना चाहिए। बचपन में यह बात अजीब लगती थी। मन में सवाल उठता था कि आखिर चांद पर पड़ने वाले साये का हमारे खाने से क्या लेना देना। लेकिन जैसे जैसे उम्र बढ़ती गई, इस परंपरा के पीछे छुपी सोच भी धीरे धीरे समझ आने लगी। आज इस लेख में हम आपको बताएंगे कि आखिर चन्द्र ग्रहण के समय भोजन से परहेज क्यों किया जाता है और इसके पीछे कौन सी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।

चंद्र ग्रहण होता क्या है

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि चंद्र ग्रहण होता कैसे है। जब पृथ्वी सूरज और चांद के बीच में आ जाती है, तो उसकी छाया चांद पर पड़ती है। इसी वजह से चांद कुछ समय के लिए धुंधला या लाल रंग का दिखाई देने लगता है। यह पूरी तरह एक खगोलीय घटना है, जो निश्चित समय के अंतराल पर होती रहती है।

विज्ञान की नजर से देखें तो यह बिल्कुल सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन भारतीय संस्कृति में चन्द्र ग्रहण को सिर्फ एक वैज्ञानिक घटना नहीं, बल्कि एक धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव भी माना गया है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है चंद्र ग्रहण कारण से जुड़ी पुरानी पौराणिक कथा, जिसे आगे विस्तार से समझते हैं।

सूतक का समय और उसका महत्व

चंद्र ग्रहण से पहले जो समय शुरू होता है, उसे सूतक का समय कहा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसी वजह से सूतक का समय शुरू होते ही कई तरह के नियमों का पालन करना शुरू कर दिया जाता है।

सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। पूजा-पाठ रोक दिया जाता है और खाना बनाना तक वर्जित माना जाता है। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और आज भी कई घरों में इसका पालन पूरी श्रद्धा से किया जाता है।

खाना न खाने के पीछे की मान्यता

अब आते हैं मुख्य सवाल पर। आखिर ग्रहण के समय खाना खाने से क्यों मना किया जाता है। इसके पीछे कई पुरानी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।

पहली मान्यता यह है कि ग्रहण के समय वातावरण में मौजूद किरणें भोजन को दूषित कर सकती हैं। हमारे पूर्वजों का मानना था कि इस समय पका हुआ या खुला रखा खाना जल्दी खराब हो जाता है। इसी वजह से पहले से पका हुआ खाना फेंकने या दान करने की परंपरा भी देखने को मिलती है। यही वजह है कि ग्रहण का प्रभाव शरीर और भोजन दोनों पर पड़ने की बात कही जाती है।

दूसरी मान्यता धार्मिक कथाओं से जुड़ी है और यही असली चंद्र ग्रहण कारण भी माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब अमृत निकला, तो राहु नाम का असुर छल से देवताओं के बीच बैठकर अमृत पी गया। सूर्य और चंद्रमा ने यह बात भगवान विष्णु को बता दी। इस पर विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन तब तक राहु अमर हो चुका था। इसी वजह से माना जाता है कि राहु आज भी सूर्य और चंद्रमा से बदला लेने के लिए समय समय पर उन्हें ग्रसित करता है। यही घटना ग्रहण के रूप में देखी जाती है।

इसी कथा के आधार पर यह भी माना जाता है कि ग्रहण के समय राहु का प्रभाव धरती पर भी पड़ता है। इसी कारण इस दौरान भोजन और अन्य शुभ कार्यों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

ग्रहण का प्रभाव शरीर पर

कई लोग यह भी मानते हैं कि ग्रहण का प्रभाव सिर्फ भोजन पर ही नहीं बल्कि इंसान के शरीर और मन पर भी पड़ता है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को इस दौरान ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

पुराने समय से यह मान्यता चली आ रही है कि ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और चाकू, कैंची जैसी नुकीली चीजों का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। इसके पीछे की सोच यह है कि ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा गर्भ में पल रहे बच्चे को प्रभावित कर सकती है।

चंद्र ग्रहण नियम जो आज भी निभाए जाते हैं

आज भी कई घरों में चंद्र ग्रहण नियम का पालन बड़ी श्रद्धा से किया जाता है। इनमें से कुछ प्रमुख बातें इस प्रकार हैं।

  • ग्रहण शुरू होने से पहले खाना पकाकर उसमें तुलसी के पत्ते डाल दिए जाते हैं ताकि वह दूषित न हो।

  • ग्रहण के दौरान सोने से बचा जाता है।

  • पूजा घर के कपाट बंद रखे जाते हैं और मूर्तियों को छूने से परहेज किया जाता है।

  • ग्रहण खत्म होने के बाद पूरे घर की साफ-सफाई की जाती है और स्नान करके ही कोई काम शुरू किया जाता है।

  • ग्रहण के तुरंत बाद जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा भी निभाई जाती है।

यह सभी चंद्र ग्रहण नियम पीढ़ियों से चले आ रहे विश्वास का हिस्सा हैं और हर परिवार अपने तरीके से इनका पालन करता है।

ग्रहण में क्या करें ताकि सकारात्मकता बनी रहे

अगर आप भी सोच रहे हैं कि ग्रहण में क्या करें ताकि माहौल सकारात्मक बना रहे, तो कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं।

ग्रहण के दौरान भगवान का नाम लेना या मन ही मन जप करना शुभ माना जाता है। इस समय शांत मन से बैठना और नकारात्मक विचारों से दूर रहना भी अच्छा माना जाता है। ग्रहण खत्म होते ही स्नान करना और साफ कपड़े पहनना परंपरा का अहम हिस्सा है।

कुछ लोग ग्रहण में क्या करें इस सवाल का जवाब आत्मचिंतन में ढूंढते हैं। वह शांत बैठकर अपने अंदर झांकने और सकारात्मक सोच बनाए रखने की कोशिश करते हैं।

आज के समय में यह मान्यता कितनी प्रासंगिक है

आज विज्ञान ने ग्रहण से जुड़े कई रहस्यों को सुलझा दिया है। हम जानते हैं कि यह सिर्फ पृथ्वी, चांद और सूरज की स्थिति का खेल है। फिर भी हमारी सांस्कृतिक परंपराएं आज भी उतनी ही मजबूती से जीवित हैं जितनी सदियों पहले थीं।

यह जरूरी नहीं कि हर मान्यता को वैज्ञानिक तराजू पर तौला जाए। कई परंपराएं हमारी संस्कृति, आस्था और पारिवारिक जुड़ाव का हिस्सा होती हैं। चन्द्र ग्रहण के दौरान खाना न खाने की यह परंपरा भी उन्हीं मान्यताओं में से एक है, जो सदियों से हमारे समाज का हिस्सा बनी हुई है।

चाहे कोई इसे विज्ञान की नजर से देखे या आस्था की, यह बात तय है कि चंद्र ग्रहण से जुड़ी यह परंपरा आज भी भारतीय घरों में उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जाती है, जितनी पहले निभाई जाती थी।


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