आज के सभ्य व शिक्षित समाज में बिस्तर में ही चाय-बिस्कुट एवं बिना स्नान किये नाश्ता-भोजन करने की आदत-सी पड़ गई है। अत: पाश्चात्य संस्कृति में आकण्ठ डूबे लोग ही प्रश्न करते हैं कि बिना स्नान किये खा लिया तो क्या हुआ?
इसका वैज्ञानिक महत्व है। शरीर विज्ञान कहता है कि जब तक स्वाभाविक क्षुधा अच्छी तरह से जागृत न हो जाए, तब तक हमें भोजन नहीं करना चाहिए। स्नान करने पर शरीर में शीतलता आती है एवं नई स्फूर्ति जागृत होती है। जिससे स्वाभाविक भूख भी जागृत होती है। उस समय किए गए भोजन का रस हमारे शरीर में पुष्टिवर्धक साबित होता है।
स्नान के पूर्व यदि हम कोई वस्तु खाये तो हमारी जठराग्नि उसे पचाने के कार्य में लग जाती है। उसके बाद स्नान करने पर, शरीर के शीतल हो जाने के कारण, उदर की पाचन-शक्ति मन्द हो जायगी। जिसके फलस्वरूप हमारा आन्त्रशोध कमजोर होगा,हमें कब्ज की शिकायत होगी, मलत्याग कठिनता से होगा एवं मनुष्य नाना प्रकार के अन्य रोगों से ग्रस्त हो उठेगा।