भारत में कई ऐसे ऐतिहासिक मंदिर हैं, जो अपनी अद्भुत कला और गहरी धार्मिक आस्था के लिए प्रसिद्ध हैं। कर्नाटक में स्थित वेणुगोपाल स्वामी मंदिर भी इन्हीं में से एक है। यह मंदिर न केवल एक पूजा स्थल है, बल्कि भारत के गौरवमयी अतीत का सजीव प्रमाण भी है। कृष्णा राजा सागर के पास होसा कन्नमबाड़ी में स्थित यह मंदिर होयसला वास्तुकला का सुंदर उदाहरण माना जाता है।
वेणुगोपाल स्वामी मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में होयसला वंश द्वारा किया गया था। उस समय होयसला शासक धर्म और कला के बड़े संरक्षक थे।
इस मंदिर के इतिहास से जुड़े प्रमुख तथ्य:
निर्माण काल- 12वीं शताब्दी
निर्माता- होयसला वंश
मूल स्थान- कन्नमबाड़ी गाँव
क्षेत्रफल- लगभग 50 एकड़
यह मंदिर अपने विशाल परिसर और मजबूत संरचना के लिए जाना जाता था।
वेणुगोपाल स्वामी को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है। ‘वेणु’ का अर्थ तमिल भाषा में बांसुरी होता है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण को बांसुरी बजाते हुए दर्शाया गया है।
धार्मिक मान्यताएँ:
भगवान कृष्ण की बांसुरी की मधुर धुन का प्रतीक।
भक्तों को मानसिक शांति और भक्ति भाव की अनुभूति होती है।
हर वर्ष मई माह में रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है।
यह मंदिर कृष्ण भक्तों के लिए विशेष श्रद्धा का केंद्र है।
मंदिर की वास्तुकला होयसला शैली की उत्कृष्ट मिसाल है। इसकी बनावट अत्यंत व्यवस्थित और कलात्मक थी।
मंदिर परिसर में शामिल संरचनाएँ:
दो प्राकार (स्तंभों वाले बरामदे)
बाहरी और भीतरी महाद्वार
यज्ञशाला और रसोई
गर्भगृह, मध्य कक्ष और मुख्य हॉल
प्रवेश द्वार के सामने के कक्ष में केशव की प्रतिमा और दक्षिण कक्ष में गोपालकृष्ण की आकृति स्थापित थी।
1909 में सर एम. विश्वेश्वरैया ने कृष्णा राजा सागर बांध परियोजना की योजना बनाई। इस बांध के पूरा होने के बाद कन्नमबाड़ी गाँव जलमग्न हो गया।
इस घटना के प्रभाव:
मंदिर लगभग 70 वर्षों तक पानी में डूबा रहा
मंदिर की कई संरचनाएँ क्षतिग्रस्त हुईं
गाँव के लोगों को विस्थापित होना पड़ा
मैसूर के राजा कृष्ण राजा वाडियार IV ने निवासियों के लिए होसा कन्नमबाड़ी नामक नया गाँव बसाया। बाद में खोडे फाउंडेशन ने मंदिर के स्थानांतरण और जीर्णोद्धार का कार्य किया, जो दिसंबर 2011 में पूरा हुआ।
आज, कावेरी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर अपनी सुंदरता, शांत वातावरण और कृष्णा राजा सागर के मनमोहक दृश्य के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।

