महाभारत का एक आख्यान है कि एक बार अर्जुन पूजा करने के लिए नीलगिरि पर्वत पर चले गए। द्रौपदी जंगल में अकेली थीं। उन्हें डर लगने लगा कि उनकी रक्षा कौन करेगा। उन्होंने भगवान कृष्ण को याद किया तो वे उनके सामने प्रकट हो गए। उनकी आशंकाओं को जानने के बाद श्रीकृष्ण ने पार्वती का उदाहरण दिया। ठीक इसी स्थिति में मां पार्वती ने भगवान शिव से मदद मांगी थी। तब शिवजी ने बताया था कि अगर स्त्री को अपने पति की चिंता हो तो उन तमाम आशंकाओं के निवारण के लिए कार्तिक कृष्णा चतुर्थी को पूजा करनी चाहिए। करवा चौथ व्रत की पृष्ठभूमि में सत्यवान और सावित्री की कथा भी है जो पति के प्रति अटूट लगाव को प्रकट करती है। किवंदती है कि एक बार यम सत्यवान की आत्मा को ले जाने के लिए आए। सावित्री ने जब मूर्छित पति को देखा तो उसने यम से गुहार लगाई मगर वे नहीं माने। इस पर सावित्री ने अन्नजल का त्यागकर दिया। अंत में यम को सत्यवान को जीवनदान देना पड़ा। इन दो कथाओं से स्पष्ट होता है कि पत्नी पति की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहती है।

