Shravan Month (सावन माह) - श्रवण मे करते है नवग्रहों को शान्त महादेव
नवग्रहों के अधिष्ठात्र देवता भगवान शिव हैं। भारतीय ज्योतिषशास्त्र में जीवन पर नवग्रहों के पड़ने वाले प्रभाव तय किए गए हैं। नवग्रहों में प्रथम सात ग्रह विशेष रूप से मायने रखते हैं बाकि राहु व केतु संस्कृति के दूसरे पड़ाव की अवधारणा हैं जिन्हे छाया ग्रह भी कहा जाता है।
नवग्रहों को भगवान शिव के अधिपत्य में से माना जाता है। नवग्रहों के अधिपत्य देवता भगवान शिव ही हैं। स्कंदपुराण, अग्निपुराण, लिंगपुराण, शिवमहापुराण, वाराहपुराण आदि ग्रंथों में शिवजी की अपार महिमा का वर्णन है। ज्योतिष में ग्रहों का क्रम भगवान् शिव के नेत्र की ज्योति से संचारित माना गया है। इसलिए जब भी जातक को किसी भी ग्रह की पीड़ा सताती है, तो उसे उक्त ग्रह की शांति के साथ भगवान शिव का अभिषेक पूजन करने की भी सलाह दी जाती है।
चौरासी महादेव, नवग्रह और श्रावण : स्कंदपुराण के अवंतिखण्ड में चौरासी महादेव की प्राचीन कथाओं का उल्लेख भी देखने को मिलता है। यह चौरासी महादेव स्वयं प्रकट हुए हैं। उज्जयिनी अवंतिका नाम से प्रसिद्ध उज्जैन नगर तीर्थ क्षेत्र माना गया है। तीर्थ क्षेत्र में स्थित ज्योतिर्लिंग भगवान् शिव की दिव्य शक्तियों का पुंज कहे जाते हैं। यहां पर स्थापित सभी शिवलिंग चैतन्य माने गए हैं। यह पृथ्वी का नाभि केन्द्र भी है। इस दृष्टि से नाभि केन्द्र में स्थित उज्जैन को नवगृह की दृष्टि एवं दिशाओं के आधार पर शिव मान्यता से चौरासी महादेव में परिणित किया गया है। उज्जैन के चौरासी महादेवों में से कुछ महादेवों पर नवग्रह का आधिपत्य माना गया है।
यहाँ पर श्रावण मास में की गयी भगवान् शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। और ऐसा माना जाता है कि अपने श्रद्धालु भक्तों को महादेव श्रावण माह में की गयी आराधना का अतिशीघ्र फल प्रदान करते है।