गर्भवती स्त्री को सूर्य – चन्द्रग्रहण नहीं देखना चाहिए, क्योकि उसके
दुष्प्रभाव से शिशु अंगहीन होकर विकलांग बन जाता है । गर्भपात की संभावना
बढ़ जाती है । इसके लिए गर्भवती के उदर भाग में गोबर और तुलसी का लेप लगा
दिया जाता है, जिससे कि राहू केतू उसका स्पर्श न करें।
ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्री को कुछ भी कैंची, चाकू आदि से काटने को मना किया
जाता है, और किसी वस्त्र आदि को सिलने से मना किया जाता है । क्योंकि ऐसी
मान्यता है कि ऐसा करने से शिशु के अंग या तो कट जाते हैं या फिर सिल
(जुड़) जाते हैं ।

