Subscribe for Newsletter
Chandra Grahan~चन्द्र ग्रहण - ग्रहण काल में न करने योग्य बातें

1. ग्रहण की अवधि में तेल लगाना, भोजन करना, जल पीना, मल-मूत्र त्‍याग करना,
सोना, केश विन्‍यास करना, रति क्रीडा करना, मंजन करना, वस्‍त्र नीचोड़्ना,
 ताला खोलना, वर्जित किए गये हैं ।


 2. ग्रहण के समय सोने से रोग पकड़ता है, लघुशंका करने से घर में दरिद्रता आती
 है, मल त्यागने से पेट में कृमि रोग पकड़ता है, स्त्री प्रसंग करने से सूअर की
 योनि मिलती है और मालिश या उबटन किया तो व्यक्ति कुष्‍ठ रोगी होता है।


 3. देवी भागवत में आता हैः सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला
 मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास
 करता है। फिर वह उदर रोग से पीड़ित मनुष्य होता है फिर गुल्मरोगी, काना और
 दंतहीन होता है।


 4. सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर पूर्व और चंद्रग्रहण में तीन प्रहर
 पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए (1 प्रहर = 3 घंटे) । बूढ़े, बालक और रोगी एक
 प्रहर पूर्व खा सकते हैं ।

 5. ग्रहण के दिन पत्‍ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ना चाहिए

 6. 'स्कंद पुराण' के अनुसार ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षो
 का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है ।

7. ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

 
Copyright © MyGuru.in. All Rights Reserved.
Site By rpgwebsolutions.com