Subscribe for Newsletter

ओम शब्द में छुपा सुख समृद्घि का रहस्य

सृष्टि के आरंभ में एक ध्वनि गूंजी ओम और पूरे ब्रह्माण्ड में इसकी गूंज फैल गयी। इसी शब्द से भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा प्रकट हुए। इसलिए ओम को सभी मंत्रों का बीज मंत्र और ध्वनियों एवं शब्दों की जननी कहा जाता है।
 
ओम शब्द के नियमित उच्चारण मात्र से शरीर में मौजूद आत्मा जागृत हो जाता है और रोग एवं तनाव से मुक्ति मिलती है। इसलिए धर्म गुरू ओम का जप करने की सलाह देते हैं। जबकि वास्तुविदों का मानना है कि ओम के प्रयोग से घर में मौजूद वास्तु दोषों को भी दूर किया जा सकता है।
 
ओम शब्द अ उ, म तथा चंद्र से मिलकर बना है। वास्तु दोष दूर करने के लिए इन अक्षरों का प्रयोग किया जा सकता है। जिनके घर में उत्तर दिशा में वास्तु दोष मौजूद हो उन्हें उत्तर दिशा में 'अ' लिखकर दीवार पर चिपका देना चाहिए।
 
दक्षिण दिशा में दोष होने पर 'म'। पूर्व दिशा में चन्द्र बिंदू लिखकर एवं पश्चिम दिशा में 'ऊ' लिखकर दीवार पर लगाना चाहिए। घर के मध्य यानी ब्रह्म स्थान में घंटी लगाने से सभी वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं।
 
 
Comments:
 
 
Ringtones
 
Vastu Tips
  Vastu Tips For Dining Room
  वास्तु में रंगों का महत्व
  कुछ सरल उपाय बच्चों की पढ़ाई के लिए
  घर से जुड़े हुआ कुछ उपयोगी वास्तु टिप्स
  शनि की साढ़ेसाती और उससे बचने के उपाय
  वास्तु शास्त्र का मानव जीवन में महत्त्व एवं प्रभाव
  जहां श्री कृष्ण ने किया था देह त्याग,जानें इस तीर्थ का बड़ा राज
  Directions and their appropriate use in home
Copyright © MyGuru.in. All Rights Reserved.
Site By rpgwebsolutions.com