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Dhulendi~धुलेंडी


धुलेंडी होली पर्व का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। होलिका दहन के अगले दिन धुलेंडी आती है।

होली दो भागों में मनाई जाती है। 

1. होलिका दहन या छोटी होली

2. धुलेंडी या बड़ी होली 


मुख्य दिन होली, जिसे संस्कृत में धूली के रूप में भी जाना जाता है, या धुलहट्टी, धुलंडी या धुलेंडी, लोग सुगंधित कलर पाउडर और इत्र एक दूसरे को लगाते हैं।

धुलेंडी उत्सव के अपने चिकित्सा कारण भी हैं। यह समय मौसम परिवर्तन का है और मौसम के परिवर्तन में बीमारियों की बहुत संभावनाएं होती हैं; इसलिए लोग टर्मरिक, नीम, कुम-कुम, केसर और बिल्व जैसे प्राकृतिक पदार्थ आदि एक-दूसरे पर दवा के रंग लगाकर खतरनाक बीमारियों से बच रहे हैं। इस प्रकार, ये दवा प्राकृतिक और हर्बल रंग से बनी है और विभिन्न रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करने में सहायक हैं।

धुलेंडी सभी आयु समूहों का एक पसंदीदा त्यौहार है और विशेष रूप से, दोस्तों के बीच, पति-पत्नी, देवर (पति का भाई) - भाभी (भाई की पत्नी) के बीच का सबसे अधिक लोकप्रिय पर्व हैं। इस दिन, हर कोई दूसरे व्यक्ति को रंग लगाने के लिए कुछ विशेष तरकीबों को खोजने की कोशिश करता है और रंगों को लगाने के बाद लोग कहते हैं, "बुरा ना मानो होली है"। बेटे, बहू और बच्चे परिवार के वरिष्ठ सदस्यों को अबीर-गुलाल लगाते हैं और फिर उनके पैर छूकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

धुलेंडी भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरह से मनाई जाती है। इस अवसर पर कई क्षेत्रीय गीत, संगीतमय नाटक और नृत्य प्रस्तुत किए जाते हैं। दिन के समय में रंग खेलने के बाद, रात में लोग एक-दूसरे से मिलते है और बधाइयां देते हैं। विशेष मिठाई गुजिया उत्तर भारतीय क्षेत्र में तैयार की जाती है। जिसे बड़े चाव से खाया जाता है |

मथुरा, वाराणसी और बरसाना प्रसिद्ध स्थान हैं और उनकी अपनी विशेष प्रकार की होली है। मथुरा में, युवा लड़के ऊंचाई पर लटकी दही हांड़ी को तोड़ने के बाद होली खेलते हैं। वृंदावन भगवान कृष्ण का पवित्र स्थान है। बरसाना की डांडिया (बांस) होली प्रसिद्ध है। बरसाना में इस दिन, महिलायें बांस की डंडियों से पुरुष को मारती हैं और घूंघट करके अपना चेहरा छिपाती हैं; और पुरुष ढाल से खुद को बचाते हैं।

इस दिन पूरा देश दोस्ती और प्यार के रंग में रंग जाता है। यह पूरी दुनिया के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है जिसे सभी धर्मों के लोगो द्वारा मनाया जाता है।

 

 



Dhulendi is a very important part of Holi festival. The next day of Holika Dahan comes to Dhulendi. 

Holi is divided into two parts: 

1. Holika Dahan or Chhoti Holi

2. Dhulendi or Big Holi

 

On the main day Holi, also known as Dhuli in Sanskrit, or Dhulhatti, Dhulandi, Dhundi or Dhulendi, people apply scented color powder and perfume to each other.

The Dhulendi festival also has its medical reasons. This is the time of change of seasons and there is a lot of possibility of diseases in the change of weather; Hence people are avoiding dangerous diseases by applying the colors of medicine on each other such as natural substances like turmeric, neem, kum-kum, saffron and bilva. Thus, these medicines are made from natural and herbal colors and are helpful in protecting our body from various diseases.

Dhulendi is a favorite festival of all age groups and is especially the most popular festival among friends, husband-wife, devar (husband's brother) - sister-in-law (brother's wife). On this day, everyone tries to find some special tricks to apply color to the other person and after applying the colors people say "Boora na maano holi hai". The son, daughter-in-law and children apply Abir-Gulal to the senior members of the family and then touch their feet and receive blessings from them.

Dhulendi is celebrated differently in different parts of India. Many regional songs, musical plays and dances are performed on the occasion. After playing colors in the daytime, people are meeting each other at night and exchange greetings. Special sweets gujiya are prepared in the North Indian region. Which is eaten with great fervor.

Mathura, Varanasi and Barsana are famous places and have their own special type of Holi. In Mathura, young boys play Holi after breaking the Dahi Handi hanging at a height held by young girls. Vrindavan is the holy place of Lord Krishna. Barsana's Dandiya (Bamboo) Holi is famous. On this day in Barsana, women kill men with bamboo sticks and veil and hide their faces; And men protect themselves from shields.

On this day, the whole country is colored in the color of friendship and love. It is one of the biggest festivals of the whole world which is celebrated by people of all religions.

 
 
 
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