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Jethi Amavasya~ज्येष्ठ वदी अमावस्या


यह पर्व मुख्य्तः एक महत्वपूर्ण तिथि है, और इस दिन स्नान, दान, जप, होम और पितरो के लिए भोजन, वस्त्र आदि देना उत्तम होता है।

ज्येष्ठ वदी अमावस्या को वट सावित्री का व्रत पूरे भारत में रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ वदी तेरस को प्रात: काल स्नान करके संकल्प करना चाहिए और तीन दिन उपवास रखना चाहिए। तेरस को रात होने पर भोजन करे। चौदस को बिना मांगे जो मिल जाये, उसी से ही एक समय भोजन करे। अमावस्या को उपवास करे। स्नान ध्यान करके वट वृक्ष के पास जाकर बांस कि डलिया में सतनजा बाहर रखकर के वस्त्रो से ढँक दे। दूसरी डलिया में सोने की ब्रह्मा और सावित्री तथा सयावान की मूर्ति रखे रोली चावल आदि से पूजा करें। वट की सूत लपेट कर पूजा करे और फेरी देवे और बड को हाथ जोड़कर घर आ जावे। यह सभी स्त्रियों के लिए श्रेष्ठ व्रत है, यह कन्याओ को अच्छा वर, सुहागिनियो को सौभाग्य पुत्र पौत्र, धन सम्पति व पति प्रेम देने वाला सर्वोत्तम व्रत है।

लोकाचार में इस दिन स्त्रियाँ नहा धोकर अच्छे कपडे तथा गहने पहन कर वट के पास जाती है। दिया जलाकर आरती करती है। आखा लेकर कहानी सुनती हैं, वट को सींचती व कूकडियों के कच्चे सूत को लपेटती हैं। फेरी देती हैं, सुहाग भोग कि कामना करती हैं, बड के पत्ते को तोड़कर उसके छोटे छोटे टुकड़े को मोड़कर चौकोर बनाती हैं। मोली लपेटकर अपने गहनों को बांधती हैं, रात को भिगोया हुआ बिंदिया बाजरा(मोठ, बाजरा, चने आदि) वट पर चढाती है, घर आकर बायना निकाल कर सास, ननद या जिठानी का आशीर्वाद लेती हैं व् उसके पश्चात ही भोजन कर व्रत खोलती हैं |

 

 


This festival is mainly an important date, and it is best to give food, clothes etc. for bathing, charity, chanting, home and ancestors on this day.

The Jyeshtha Vadi Amavasya or Jethi Amavasya is observed throughout India. According to the scriptures, Jyestha Vadi Devotees should take a bath in the morning and resolve and fast for three days. Eat Teres at night. Without asking the fourteen, who get the milk, they should have a meal at the same time. Fast on Amavasya. After taking a bath, go to the Vat tree and put the satanja out of the bamboo basket and cover it with clothes. From the second thread, put the Brahma and Savitri of gold and the gold statue of Saywan. Worship with roli rice etc. Wrap with a cotton thread and come home with folded hands and bud. This is the best vow for all women, it is the best vow for girls, good son to grand daughter, wealth, Prosperity and husband love.

On this day, in the ethos, women take a bath after wearing good clothes and jewelry and go to the vat. Perform aarti by lighting lamps. He listens to the story with a saw, irrigates the vat and wraps it with raw cotton. She hauls, Suhag wishes for enjoyment. The vat leaves are broken and folded into small pieces to make them square. The moli wraps and ties her ornaments, the night-soaked bindiya bajra (moth, millet, gram, etc.) is put on the vat, after coming home, take out the bayana and take the blessings of the mother-in-law or sister-in-law, and then open the fast by eating it.

 
 
 
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