Cheti Chand

Cheti Chand
This year's Cheti Chand

Saturday, 02 Apr - 2022

Cheti Chand in the Year 2022 will be Celebrated on Saturday, 02 April 2022.

The birthday of Water god (Varun Devta) Sai Uderolal or Jhulelal is called Cheti Chand and this day also corresponds to Guru Nanak’s birthday. Varun Dev as Sai Uderolal or Jhulelal has incarnated to protect Sindhis. Cheti Chand is observed on the first day of the Sindhi Chet month (March – April) or Chaitra month in the Hindu calendar; hence called CHET-I-CHAND. Cheti Chand is the beginning of Sindhi New Year. Businessmen take the day to start new account books. Cheti Chand This most popular Sindhi festival is celebrated on a day during the waxing phase of the moon of Chet month. The day holds importance that on this day Varun Dev appeared as Uderolal on the first day of Chet month to save Sindhis from the dictatorship of a ruler who wanted to destroy the Sindhi culture and Hinduism. The main festival starts with the worship of Jhulelal and Bahrani. Men perform the folk dance, Chej on Sindhi music before Jhulelal. All the organizations or institutions dedicated to Sindhis celebrate this festival with gaiety and pomp. Aarti of the Sea God of the Sindhis, Jhoolelal Sain is done. The day offers the advantage of worshipping water – the elixir of life. Maharana Sahib Baharana Sahib Consists of Jyot, Sugar Candy, Photo, Fruits, Akha. Behind is a Bronze Pot and a Coconut in it, covered with Cloth, Flowers, Leaves, and Idol of God Jhulelal. On this day Baharana Sahib is taken to nearby River or Lake.

.चेती चाँद जल के स्वामी( वरुण देव ) साई उदेरोलाल और  झूलेलाल जी का जन्मदिवस है और यह गुरु नानकदेव जी के जन्मदिवस से भी जुड़ा है। साई उदेरोलाल और झूलेलाल सिंधीयो की रक्षा के लिए वरुण देव के अवतरण माने जाते है। चेती चाँद सिंधी चेत माह अथवा हिन्दू पंचांग के प्रथम दिवस को मनाया जाता है इसीलिए यह चेती चाँद कहलाता है। चेती चाँद सिंधी नव वर्ष का प्रारम्भ माना जाता है। व्यापारी इस दिन नए बही खातों का आरम्भ करते है। चेती चाँद यह सर्वाधिक लोकप्रिय सिंधी पर्व चाँद के चेत माह में बढ़ते हुए क्रम के समय मनाया जाता है। यह दिवस अपना विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन वरुण देव उदेरोलाल के रूप में अवतरण लेकर प्रकट हुए थे और सिंधीयो की उस समय के क्रूर शाशक जो सिंधी सभ्यता और हिंदुत्व को को समाप्त करना चाहता था की क्रूरता से रक्षा की। मुख्य पर्व झूलेलाल और भराणो की पूजा अर्चना से प्रारम्भ होता है। पुरुष झूलेलाल के सम्मुख सिंधी संगीत पर लोकनृत्य पेश करते है। सभी समूहों, संगठनों और विधायालयो द्वारा ये पर्व सिंधीयो को समर्पित करते हुए आनंद उत्साह और भव्यता से मनाया जाता है। सिंधीयो के समुद्र देव और झूलेलाल की आरती की जाती है। इस दिन समुद्र देव और जल की पूजा करने से जीवन अमृत प्राप्त होता है। भराणा साहिब में ज्योत, गुड़, बर्तन, फल, फूल, आका होते है तांबे का बर्तन और नारियल एक कपडे से ढका होता है, फल फूल पत्तियों के साथ भगवान् झूले लाल । भराणा साहिब पास की नदी अथवा तीर्थ स्थान पे रखा जाता है।     

 
 
 
 
 
 
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