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When is Ahoi Ashtami

When is Ahoi Ashtami
This year's When is Ahoi Ashtami

Monday, 21 Oct - 2019

Ahoi Ashtami in the Year 2019 will be Celebrated on Monday, 21 Octuber 2019.

कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष कि अष्टमी को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है|  यह व्रत पूजन बच्चों व पति की दीर्घायु हेतु किया जाता है |अहोई अष्टमी व्रत उदयकालिक एवं प्रदोषव्यापिनी अष्टमी को ही रखने का विधान है| यह व्रत मुख्यत: महिलाओं द्वारा किया जाता है| सन्तान की सुरक्षा और उसकी समृद्धि व् सफलता के लिए यह व्रत प्रमुख है | इस वर्ष अहोई अष्टमी 21 अक्टूबर 2019 को मनाई जा रही है |

 

शुभ मुहूर्त व् दिनांक

अहोई अष्टमी 2019


21 अक्टूबर 2019- सोमवार

पूजा का समय – 19:38 से 20:43 मिनिट तक

तारों के दिखने का समय- सायं 20:10 बजे

चंद्रोदय रात्रि- 02:41 मिनिट (22 अक्टूबर 2019)

अष्टमी तिथि प्रारम्भ -21 अक्टूबर 2019 को दोपहर 2 बजकर 14 मिनिट से

अष्टमी तिथि समाप्त- 22 अक्टूबर 2019 को दोपहर 12: 55 तक

 

अहोई अष्टमी व्रत कथा

इस त्यौहार को मनाने के पीछे एक कथा लोकप्रिय है मान्यता है कि एक साहूकार के सात पुत्र और एक पुत्री थी। साहूकार के बेटों की शादी हो चुकी थी और बेटी भी विवाहित थी। साहूकार की बेटी दीपावली के अवसर पर अपने ससुराल से मायके आई थी। दिवाली पर घर की साफ-सफाई कर घर को लीपने का कार्य था, इस वजह से सारी बहुएं वन से मिट्टी लेने गई, यह देखकर ससुराल से मायके आई साहूकार की बेटी भी उनके साथ चल पडी। 

साहूकार की बेटी जब मिट्टी खोद रही थी, उस जगह पर स्याहु अपने बच्चों के साथ रहती थी, मिट्टी खोदते समय गलती से साहूकार की बेटी द्वारा खुरपी के चोट से स्याहु के एक बच्चे की मृत्यु हो गई | इस पर क्रोधित होकर स्याहु ने कहा की मै तेरी कोख बांधूंगी। स्याहु के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक एक कर विनती करती है कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा ले, छोटी बहु इसके लिए मान जाती है ,इसके पश्चात छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते है, उनकी सात दिन बाद मृत्यु हो जाती है, सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के उपरान्त उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा। पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने का उपाय बताया।

छोटी बहु सुरही की पुरे समर्पण से सेवा करती है | सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और छोटी बहू से पूछती है की तू किस लिए मेरी इतनी सेवा कर रही है और वह उससे क्या चाहती है? जो कोई भी तेरी इच्छा हो, वह मुझसे मांग लें। साहूकार की बहु ने कहा कि स्याह माता ने मेरी कोख बाँध दी है, जिसके मेरे बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ नहीं होते और शीघ्र ही मर जाते है, यदि आप मुझे इस विपदा से निकाल दे तो मै आपका उपकार मानूँगी। गाय माता ने उसकी बात मान ली और उसे साथ लेकर सात समुद्र पार स्याहु माता के पास ले चली।  

रास्ते में थक जाने पर दोनों विश्राम करने लगते है। अचानक साहूकार की छोटी बहू की नजर एक ओर जाती है और वह देखती है की एक सांप पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है। इतने में गरूड पंखनी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है की छोटी बहू ने उसके बच्चे को मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है। इस पर छोटी बहू कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है और गरूड पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याहु के पास पहुंचा देती है। छोटी बहू स्याहु की भी सेवा करती है और स्याह छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहू होने का आशीर्वाद देती है, स्याहु छोटी बहू को सात पुत्र और सात पुत्र वधुओं का आशीर्वाद देती है और कहती है की घर जाने पर तू अहोई माता का ध्यान करना। सात-सात अहोई बनाकर सात कड़ाही देना, उसने घर लौट कर देखा तो उसके सात बेटे और बहुएं मिली वह खुशी के मारे रोने लगी। उसने सात अहोई बनाकर सात कड़ाही देकर उद्यापन किया। उसके बाद से ही अपने संतान के सुख और कल्याण के लिए अहोई माता का व्रत करने की परम्परा है।


अहोई अष्टमी पूजा विधि

अहोई अष्टमी पूजा की तैयारियां सूर्यास्त से पूर्व संपन्न करनी होती हैं।

सर्वप्रथम, दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाया जाता है। अहोई माता के चित्र में अष्टमी तिथि होने के कारण आठ कोने अथवा अष्ट कोष्टक होने चाहिए।

लकड़ी की चौकी पर माता अहोई के चित्र के बांई तरफ जल से भरा पवित्र कलश रखा जाना चाहिए। कलश पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर मोली बाँधी जाती है।

इसके बाद, अहोई माता को पूरी, हलवा तथा पुआ युक्त पका हुआ भोजन जिसे वायन भी कहा जाता है, अर्पित किया जाना चाहिए। अनाज जैसे ज्वार अथवा कच्चा भोजन (सीधा) भी मां को पूजा में अर्पित किया जाना चाहिए।

परिवार की सबसे बड़ी महिला परिवार की सभी महिलाओं को अहोई अष्ठमी व्रत कथा का पाठ करती हैं। कथा सुनते समय सभी महिलाओं को अनाज के सात दाने अपने हाथ में रखने चाहिए।

पूजा के अंत में अहोई अष्टमी आरती की जाती है।

कुछ समुदायों में चाँदी की अहोई माता जिसे स्याऊ भी कहते है बनाई व् पूजी जाती है। पूजा के बाद इसे चाँदी के दो मनकों के साथ धागे में गूँथ कर गले में माला की तरह पहना जाता है।

पूजा सम्पन्न होने के बाद महिलाएं अपने परिवार की परंपरा के अनुसार पवित्र कलश में से चंद्रमा अथवा तारों को अर्घ देती हैं। तारों के दर्शन से अथवा चंद्रोदय के पश्चात अहोई माता का व्रत संपन्न होता है।

 

Ashtami of Krishna Paksha of Kartik month is observed as Ahoi Ashtami fast. This fast is worshiped for the longevity of children and husband. The Ahoi Ashtami fast is a law to keep Udayaki and Pradosh Vyapini Ashtami. This fast is mainly performed by women. This fast is important for the safety of the child and its prosperity and success. This year Ahoi Ashtami is being celebrated on 21 October 2019.


Auspicious time

Ahoi Ashtami 2019

21 October 2019 - Monday

 Worship time - 19:38 to 20:43 minutes

 Starlight hours - 20:10 pm

 Chandrodaya Night - 02:41 minutes (22 October 2019)

 Ashtami start date - 21 October 2019 from 2 to 14 minutes

 Ashtami date ends - 22 October 2019 till 12:55 pm

 

Ahoi Ashtami Vrat Katha

A legend behind celebrating this festival is popular belief that a moneylender had seven sons and a daughter. The moneylender's sons were married and the daughter was also married. The moneylender's daughter came to her maternal home from her in-laws on the occasion of Deepawali. On Diwali it was the task of cleaning the house and plunging the house, due to this, all the daughters went to take soil from the forest, seeing that the daughter of the moneylender from the in-laws came with her.

When the moneylender's daughter was digging mud, Syahu lived with her children, a child of Syahu died of accidental injury by the moneylender's daughter while digging mud. Angry at this, Syahu said that I will bind your womb. Hearing the words of Syahu, the daughter of the moneylender begs her seven sisters-in-law to get her womb tied instead, the younger daughter agrees for it, after which all the children of the younger sister-in-law, die after seven days. It is, after seven sons have died like this, that he called the Pandit and asked the reason for this. Pandit explained the way to serve a sushi cow.

The younger daughter serves the Surhi with complete dedication. Sushi is pleased with the service and asks the younger daughter-in-law, why are you serving me so much and what does she want from him? Whatever your wish is, ask me. The daughter-in-law of the moneylender said that Syah Mata has tied my womb, whose children are not completely healthy and dies soon if you expel me from this calamity, I will accept your favor. Cow Mata obeyed him and took him with him across the seven seas to Sihu Mata.

Both get rested on the way. Suddenly, the moneylender's younger daughter-in-law goes to one side and she sees that a snake is going to sting the petal child and she kills the snake. At this point, the Garuda Phani comes there and seeing the blood-splattered, she feels that the younger daughter-in-law has killed her child, on which she starts bending the younger daughter-in-law. At this, the younger daughter-in-law says that she has saved her child's life and the Garuda Phanni is happy over it and brings them to Syahu along with Sushi. The younger daughter-in-law also serves Syahu and the Syah is pleased with the younger daughter-in-law's blessings to have seven sons and seven daughters-in-law, Sihu blesses the younger daughter-in-law with seven sons and seven sons-in-law and tells her to go home You should meditate on Ahoi Mata. After making seven woks and giving seven woks, when she returned home and saw her seven sons and daughters-in-law, she started crying in happiness. He raised seven boys and gave them seven kids. Since then, there is a tradition of fasting Ahoi Mata for the happiness and welfare of her children.


Ahoi Ashtami Puja Vidhi

Preparations for Ahoi Ashtami Puja have to be done before sunset.

First of all, a picture of Ahoi Mata is made on the wall. There should be eight corners of eight brackets in the picture of Ahoi Mata due to having an Ashtami date.

A sacred urn filled with water should be placed on the left side of the picture of Mata Ahoi on the wooden post. The mole is tied by making a swastika symbol on the urn.

After this, Ahoi Mata should be offered cooked food consisting of puri, pudding, and puva  ​​also called Wayan. Grains like jowar or raw food (straight) should also be offered to the mother in worship.

The eldest woman of the family recites Ahoi Ashtami Vrat Katha to all the women of the family. All women should keep seven grains of grain in their hands while listening to the story.

The Ahoi Ashtami Aarti is performed at the end of the puja.

In some communities, Ahoi Mata of silver, also called Syau, is made and worshiped. After the puja, it is worn like a garland around the neck with two beads of silver knotted in thread.

After the puja is completed, the women offer the moon or stars from the sacred urn as per their family tradition. Ahoi Mata fast is observed by sight of stars or after moonrise.

 
 
 
 
 
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